ना इफ्तार, ना ही ईद मिलन; क्या तेजस्वी बदल रहे हैं मुसलमानों को लेकर रणनीति?
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस बार ना तो इफ्तार पार्टी दी और ना ही ईद मिलन समारोह में शामिल हुए। ऐसे में उनके इस कदम को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

तेजस्वी यादव। Photo Credit- PTI
बिहार देश का ऐसा राज्य है, जहां माना जाता है कि यहां की जनता वोट अपने 'खेमे' के नेता को देखकर ही देती है। राज्य के वोटिंग पैटर्न में जाति सबसे प्रमुख कारक है। यही वजह है कि बिहार में हर जाति के अलग-अलग नेता हैं और उसी संख्या में पार्टियां भी यहां मौजूद हैं। जातियां अपने नेता को पहचानकर वोट देती ही हैं, मगर इनको संभालकर रखना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। हालांकि, इन सबसे बीच मुसलमान भी हैं जो अपने वोट के जरिए बिहार की सरकार बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं।
राज्य में मुसलमानों को अपने पाले में बनाए रखने के लिए राज्य दी दो सबसे बड़ी पार्टियां राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड लगातार काम करती रही हैं। इसके अलावा चिराग पासवान की एलजेपी (आर) भी पीछे नहीं रहती। इन दलों के बीच हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी आ गई है। AIMIM प्रभावी रूप से मुसलमानों को अपने पाले में करने में कामयाब भी हो गई है।
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अभी तक बिहार में आमतौर पर माना जाता रहा है कि मुसलमान आरजेडी और पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के लिए लॉयल रहते हैं। इसमें से कुछ सीएम नीतीश कुमार को भी वोट करते हैं। पिछला विधानसभा चुनाव आरजेडी के नेतृत्व में महागठबंधन हार गया, इसके बाद हालिया राज्यसभा चुनाव में भी आरजेडी को हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि आरजेडी नेता तेजस्वी यादव मुसलमानों से नाराज हैं। दरअसल, विधायक तेजस्वी ने इस बार ना तो इफ्तार पार्टी दी और ना ही ईद मिलन समारोह में शामिल हुए। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या तेजस्वी यादव मुसलमानों को लेकर रणनीति बदल रहे हैं...
राजनीति में पहले ये कुछ तय नहीं
राजनीति में उतार-चढ़ाव बहुत छोटे-छोटे घटनाक्रम से तय होते हैं। यह सियासत की खासियत है, इसमें कोई भी चीज पहले से तय नहीं होती। परिस्थितियां देखते स्थितियां बदल जाती हैं। बिहार में लालू प्रसाद यादव दशकों से रमजान के महीने में मुसलमानों के लिए पटना में इफ्तार पार्टी किया करते थे। लालू की इफ्तार पार्टी के चर्चे अखबारों की सुर्खियां बनते थे, लेकिन इस बार आरजेडी की कमान तेजस्वी यादव के हाथ में है। आरजेडी या तेजस्वी ने इस बार इफ्तार पार्टी नहीं की और ना ही ईद में शरीक होने की उनकी फोटो आई है।

तेजस्वी यादव के इस कदम की बिहार में चर्चा है। जहां तेजस्वी यादव ईद के त्यौहर से नदारद दिखाई दिए वहीं, राजनीति में आए नए नवेले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ईद के मौके पर बेहद सक्रिय दिखे। निशांत कुमार ने पटना के गांधी मैदान पहुंचकर ईद मना रहे लोगों से मिले। वह लोगों से मिले और उन्हें ईद की बधाइयां दी। तेजस्वी अपने सोशल मीडिया से ही ईद की बधाई देकर रह गए।
निशांन कुमार ने क्या कहा?
इस मौके पर निशांन कुमार ने कहा, 'आज ईद का अवसर है। ईद के इस पाक अवसर पर बिहार और देशसियों को बधाई देते हैं। हर घर में संमृद्धि और खुशहाली रहे और सभी लोग उन्नति करें। मेरी कोशिश यही है कि मैं सभी धर्मों को साथ लेकर चलूं... जैसे मेरे पिता नीतीश कुमार लेकर चलते हैं। भाईचारा और शांति बनी रहे।'
https://twitter.com/Jduonline/status/2035338133026566342
पटना में नहीं दिखाई दिए तेजस्वी
दूसरी तरफ तेजस्वी पटना में नहीं दिखाई दिए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या निशांत कुमार, तेजस्वी यादव से इस मामले में आगे निकल गए हैं। तेजस्वी यादव लालू यादव के बेटे हैं, तो निशांत कुमार भी नीतीश कुमार के बेटे हैं। लालू प्रसाद यादव ने इफ्तार पार्टी देने की परंपरा स्थापित की थी। ऐसे में क्या स्थापित परंपरा को इस बार तेजस्वी यादव विमुख हो गए? नीतीश कुमार ने दिल्ली जाने के फैसले के बाद भी इफ्तार पार्टी का आयोजन किया, लेकिन तेजस्वी यादव ने लालू प्रसाद की तरह इफ्तार पार्टी नहीं किया। हालांकि, पिछले साल तेजस्वी यादव ने नया साल मनाते और क्रिसमस मनाते हुए सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर की थीं।
https://twitter.com/yadavtejashwi/status/2034994832415105322
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बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार ने लालू यादव को पटखनी दी है। निशांत अपने पिता की परंपरा के मुताबिक ईद मनाने गांधी मैदान पहुंच गए और वहां से भाईचारा का संदेश दिया। आने वाले चुनावों में तेजस्वी और निशांत आमने-सामने होंगे। निशांत ऐसे ही मौकों को लपकते रहे तो लोगों को अपने पाले में करने में कामयाब हो सकते हैं।
वोट का समीकरण?
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में 2025 का विधानसभा चुनाव महागठबंधन ने लड़ा। यह चुनाव महागठबंधन हार गया और उसके खाते में महज 35 सीटें आई। इसमें से अकेले आरजेडी के पास 25 सीटें ही आईं। बीजेपी-जेडीयू के नेतृ्त्व वाले एनडीए ने ऐतिहासिक 202 सीटों पर जीत हासिल की। जहां इस चुनाव में एनडीए ने लगभग 45 फीसदी वोट हासिल किए वहीं, पास विपक्ष को 38 प्रतिशत वोट मिला।
इस चुनाव में तेजस्वी यादव के पास सीटों की संख्या कम जरूर हैं। मगर, उनके पास समूचे विपक्ष को मिलाकर 38 फीसदी वोट प्रतिशत है। इसमें मुसलमान वोटरों का काफी योगदान है। इस 38 फीसदी में थोड़ी और मेहनत करके आरजेडी सत्ता तक भी पहुंच सकती है। मगर, तेजस्वी यादव के इन कदमों से मुसलमान जेडीयू और निशांत कुमार के पास जा सकते हैं।
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