देश के 4 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं। हर किसी की नजरें चुनाव आयोग के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर है। चुनाव आयोग, रविवार शाम 4 बजे आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावों का एलान कर सकता है। असम, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों होने वाले हैं। विपक्ष के एक धड़े का कहना है कि चुनावों का एलान और पहले होना चाहिए। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा है कि चुनाव आयोग, बीजेपी के साथ मिलकर काम कर रहा है।
चुनाव आयोग ने चुनावों की तारीखों का एलान करने के लिए 4 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। असम, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने वाला है। मई और जून में ही राज्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है।
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी कर ली है। 4 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेश के लिए अंतिम वोटर लिस्ट भी प्रकाशित हो चुकी है। चुनाव आयोग के तारीखों के एलान से पहले नेता क्या कह रहे हैं, आइए जानते हैं-
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'BJP दफ्तर में चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस'
संजय राउत, सांसद, शिवसेना (UBT):-
मुझे नहीं पता कि चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस कहां होगी, शायद BJP के दफ्तर में हो सकती है। अभी का जो मुख्य चुनाव आयुक्त है, वह बीजेपी के लिए काम करता है। आज चुनाव आयोग BJP की ही एक एक्सटेंडेड ब्रांच बन गया है। अगर कोई बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस होने जा रही है तो बीजेपी के मुख्यालय में चुनाव आयोग करे तो हमें हैरानी नहीं होगी।
संजय राउत ने कहा, 'हम चुनाव आयोग के खिलाफ नहीं, विपक्ष है। जो विश्वासमत प्रस्ताव लाया है, हमें विश्वास नहीं है। इनके प्रेस कॉन्फ्रेंस, विचार से हम सहमत नहीं हैं। चुनाव आयोग, न्याय व्यवस्था, नरेंद्र मोदी के दबाव में काम करती है। हमें इस चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है। ये ऐसे लोग हैं जो BJP के लिए काम करते हैं।'
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बीजेपी क्या कह रही है?
बीजेपी सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा, 'बीजेपी 24 घंटे सातों दिन लोगों के हित के लिए, चुनाव के लिए तैयार रहती है। चाहें वो आम चुनाव हों, विधानसभा चुनाव हों या पंचायत चुनाव हों। हम हमेशा तैयार रहते हैं और हमारे लोग हमेशा काम करते हैं।'
विपक्ष देरी पर उठा रहा सवाल
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर कहा, 'हम इसका स्वागत करते हैं। हम बहुत लंबे समय से इसका इंतज़ार कर रहे थे। असल में, इसकी घोषणा बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी। मैं चुनाव आयोग से कहना चाहूंगा कि आप पर पहले से ही इतने सारे संदेह हैं, लेकिन कम से कम चीजें इतनी बेशर्मी से तो न करें। प्रधानमंत्री लगातार धड़ाधड़ घोषणाएं करते रहते हैं, और फिर अचानक आपको तारीखों की घोषणा करने का ख्याल आता है।'