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बसंत पंचमी पर इस मुहूर्त में करें देवी सरस्वती की पूजा और विधि

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की उपासना को बहुत ही महत्वपूर्ण माना है। आइए जानते हैं, पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व।

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देवी लक्ष्मी।(Photo Credit: Creative Image)

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हिंदू धर्म में बसंत पंचमी पर्व को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर माता सरस्वती की उपासना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। शास्त्रों में बसंत पंचमी पर्व के महत्व को विस्तार से बताया गया है। कहा जाता है कि शुभ मुहूर्त में की गई पूजा से व्यक्ति को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं पूजा मुहूर्त और स्नान का समय।

वसंत पंचमी 2025 पूजा मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का समापन 03 फरवरी को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर हो जाएगा। ऐसे में बसंत पंचमी की पूजा 02 फरवरी और 03 फरवरी, दोनों दिन की जाएगी। 02 फरवरी को पूजा मुहूर्त सुबह 07 बजे से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। वहीं, 03 फरवरी को पूजा और स्नान का मुहूर्त सुबह 06 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।

 

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बसंत पंचमी की पूजा विधि

इस दिन प्रातः स्नान करके पीले वस्त्र धारण किए जाते हैं, क्योंकि पीला रंग समृद्धि, बुद्धि और बसंत ऋतु का प्रतीक होता है। मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र को एक साफ स्थान पर स्थापित कर पीले फूल, अक्षत (चावल), हल्दी, गुड़ और सफेद वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। पूजा में वीणा, पुस्तक और स्याही की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद मंत्रों का उच्चारण कर देवी सरस्वती की आरती की जाती है।

बसंत पंचमी का महत्व

बसंत पंचमी से ही बसंत ऋतु के आगमन की शुरुआत मानी जाती है, जिससे प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन वसंत के स्वागत में खेतों में सरसों के पीले फूल खिलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं, इसलिए यह विद्या, संगीत और बुद्धि की प्राप्ति के लिए शुभ अवसर माना जाता है।

 

Disclaimer- यहां दी गई सभी जानकारी सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। Khabargaon इसकी पुष्टि नहीं करता।


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