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रिवाजों से परे, बौद्ध शादी में क्यों मायने रखता है सिर्फ रिश्ता, न कि रस्में

बौद्ध धर्म की शादियां दर्जनों रस्मों की बजाय सादगी से भरी होती हैं, जहां शादी में रस्मों से ज्यादा रिश्तों को अहमियत दी जाती है। जानिए बौद्ध शादी की परंपरा क्या है।

Buddhist weddings

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Sora

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आज के दौर में शादियां दर्जनों रस्मों और परंपराओं के बीच घिरी नजर आती हैं, जिसकी वजह से शादी खत्म होने में कई घंटे लगते हैं लेकिन बौद्ध विवाह एक अलग और सादगी भरी सोच के साथ सामने आता है, जहां शादी लगभग 30 मिनट से 1 घंटे के बीच संपन्न हो जाती है। बौद्ध शादी में न तो रीति-रिवाजों और परंपराओं पर दबाव दिया जाता है बल्कि यहां दूल्हा-दुल्हन की आपसी समझ और सहमति पर जोर दिया जाता है। बौद्ध शादी की परंपरा गौतम बुद्ध के विचारों के आधार पर बनी है।

 

बौद्ध धर्म की शादी परंपरा अपने आप में बेहद खास है, जहां शादी से पहले शुभ मुहूर्त, दूल्हा-दुल्हन का कुंडली मिलान जैसी परंपराएं नहीं मानी जाती हैं। बौद्ध धर्म में शादी को धार्मिक बंधन से ज्यादा रिश्तों के बंधन के रूप में देखा जाता है। आज के दौर में नई पीढ़ी रस्में, रिवाज और परंपराओं के बिना शादी करना पसंद कर रही है। ऐसे में बौद्ध शादी एक नयी सोच के तौर पर सामने आती है, जहां रिश्ते की गहराई रस्मों से कहीं ज्यादा मायने रखती है। अब सवाल उठता है कि बौद्ध धर्म में शादी किस प्रकार होती है?

 

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शादी में क्यों मायने रखता है रिश्ता?

 

बौद्ध धर्म में शादी को एक धार्मिक संस्कार के तौर पर नहीं देखा जाता, बल्कि इसे एक सामाजिक व्यवस्था माना जाता है। बौद्ध मान्यता के मुताबिक शादी प्रेम, जिम्मेदारी और साझेदारी का प्रतीक है। इसी वजह से बौद्ध शादियों में रस्मों-रिवाज जैसे सात फेरे लेना और मुहूर्त देखकर शादी नहीं की जाती है। जब वर-वधु की इच्छा हो, उसी दिन शादी कराई जा सकती है।

 

क्या है बौद्ध शादी की प्रक्रिया?


1. सगाई जरूरी नहीं- बौद्ध धर्म में सगाई की परंपरा जरूरी नहीं मानी जाती है, लेकिन अगर वर और वधु की इच्छा हो तो सगाई कराई जा सकती है। सगाई के दिन लड़का-लड़की रिंग एक्सचेंज करते हैं, इसके बाद भिक्षु से आशीर्वाद लेते हैं।


2. लाल जोड़े की बजाय सफेद जोड़ा- बौद्ध धर्म में हिंदू धर्म की तरह दुल्हन लाल जोड़ा नहीं पहनती, बल्कि सफेद कपड़े पहनती है। सफेद कपड़े को सादगी और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।

 

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3. मंत्रों का जाप- बौद्ध शादी अक्सर किसी हॉल या होटल में भी की जाती है, जहाँ एक मेज पर सफेद कपड़ा बिछाकर गौतम बुद्ध की तस्वीर रखी जाती है। इसके बाद वर-वधु मिलकर बुद्ध के सामने प्रार्थना करते हैं और फल-फूल चढ़ाते हैं। फिर वर-वधु समेत पूरा परिवार मिलकर मंत्रों का जाप करता है।


4. पति-पत्नी लेते हैं वचन- मंत्रों के जाप के बाद बौद्ध शादी में सात फेरे नहीं होते। इसके बजाय वर वचन लेता है कि वह अपनी पत्नी को प्रेम और सम्मान देगा। इसके बाद वधु भी शपथ लेती है कि वह पति के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाएगी। इसके बाद विवाह संपन्न हो जाता है।

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