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हिमालय में छिपा वह स्थान जहां हनुमान जी ने तोड़ा था भीम का घमंड

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हनुमान चट्टी का अपना एक विशेष महत्व है। आइए जानते हैं इस स्थान से जुड़ी पौराणिक कथा और मान्यताएं।

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बद्रीनाथ धाम से कुछ दूर पर स्थित हनुमान चट्टी।(Photo Credit: insta__monk/Insta)

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देश के विभिन्न हिस्सों में हनुमान जी को समर्पित विभिन्न मंदिरों के दर्शन होते हैं, जिनका अपना एक इतिहास और महत्व जुड़ा। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हनुमान चट्टी, बदरीनाथ धाम से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक अत्यंत पवित्र स्थल है। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां का ऐतिहासिक मंदिर भगवान हनुमान जी को समर्पित है। आइए जानते हैं कि क्या है हनुमान चट्टी की पौराणिक कथा और इस स्थान से जुड़ी मान्यताएं।

पौराणिक कथा – हनुमान जी और भीम की भेंट

हनुमान चट्टी से जुड़ी सबसे प्रमुख पौराणिक कथा महाभारत काल की है। कथा के अनुसार जब पांडव अपने अज्ञातवास के बाद स्वर्गारोहण की यात्रा पर निकले, तो उन्हें रास्ते में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उसी दौरान भीमसेन, जो सबसे बलशाली माने जाते थे, हिमालय की ओर एक संकरी घाटी से गुजर रहे थे। इस दौरान रास्ते में उन्हें एक बूढ़ा वानर रास्ते में लेटा हुआ मिला, जिनकी पुंछ रास्ते में पड़ी थी।

 

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भीमसेन ने क्रोधित होकर उस वानर से कहा कि वह रास्ता छोड़ दे लेकिन वानर ने कहा कि वह बहुत बूढ़ा और थका हुआ है, आप चाहें तो मेरी पूंछ हटा दीजिए। भीम ने जैसे ही पूंछ हटाने की कोशिश की, वह अपनी पूरी ताकत लगाने के बावजूद उसे नहीं हिला सके। ऐसे में भीम को समझ आ गया कि यह कोई सामान्य वानर नहीं हो सकते। उन्होंने विनम्र होकर पूछा कि आप कौन हैं? तब वानर ने अपना असली रूप प्रकट किया– वह स्वयं हनुमान जी थे। हनुमान जी ने भीम का घमंड तोड़ा और उन्हें आशीर्वाद दिया। इसी कथा के कारण इस स्थान को हनुमान चट्टी के नाम से जाना जाता है। हालांकि, इस कथा से जोड़कर कुछ  भी स्थान चर्चा में आते हैं।

स्थान से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

मान्यता है कि इस स्थान पर आज भी हनुमान जी की दिव्य उपस्थिति बनी रहती है। भक्तों का विश्वास है कि जो यहां सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उन्हें बल, बुद्धि और निर्भयता प्राप्त होती है। हनुमान चट्टी में स्थित मंदिर बहुत ही शांत और आध्यात्मिक वातावरण से परिपूर्ण है। यह मंदिर विशेष रूप से हनुमान जयंती, राम नवमी और एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं से भर जाता है। यहां की पूजा पद्धति साधारण होते हुए भी बहुत श्रद्धापूर्ण होती है। इसके साथ हनुमान चट्टी सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी बेहद खास जगह है। यहां से कई ट्रैकिंग रूट्स की शुरुआत होती है, जैसे यमुनोत्री ट्रैक।

 

Disclaimer- यहां दी गई सभी जानकारी सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं।

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