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13 या 14 अप्रैल, कब है वरुथिनी एकादशी? व्रत से लेकर पूजा तक का तरीका जानिए

अप्रैल महीने में वरुथिनी एकादशी का व्रत मनाया जाएगा। इस व्रत की सही तारीख, पूजा-अर्चना का सही समय और व्रत का महत्व जानिए।

Varuthini Ekadashi

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Sora

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हिंदू धर्म में वरुथिनी एकादशी व्रत का खास महत्व है। इस व्रत में सभी भक्त भगवान विष्णु की उपासना करते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक यह व्रत वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है, जो इस साल अप्रैल महीने में पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा और सच्ची भावना से रखता है, उनकी सभी मनोकामनाएं भगवान विष्णु पूरी करते हैं। धार्मिक जानकारों के मुताबिक वरुथिनी एकादशी के व्रत को किसी सन्यांसी के 10 हजार साल की तपस्या के बराबर माना गया है। इस व्रत को रखने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

 

इस साल कई लोगों को कन्फ्यूजन है कि वरुथिनी एकादशी व्रत की सही तारीख क्या है। जहां कुछ लोगों का मानना है कि 13 अप्रैल को व्रत हैं, वहीं कुछ लोगों को लगता है कि यह व्रत 14 अप्रैल को है। ऐसे में सवाल उठता है कि किस दिन व्रत रखना शुभ रहेगा? आइए जानते हैं सही तारीख, पारण का समय और पूजा विधि।

 

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कब है वरुथिनी एकादशी?

साल 2026 में वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल यह व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है। एकादशी तिथि 13 अप्रैल की रात 1:16 बजे शुरू होगी और 14 अप्रैल की रात 1:08 बजे समाप्त होगी।

कब करें पारण?

वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण 14 अप्रैल की सुबह 6:54 बजे से शुरू होकर 8:31 बजे तक रहेगा। इस समय के बीच पारण करना सबसे शुभ माना जाता है।

 पूजा की विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर घर के पूजा स्थान या मंदिर में जाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा के दौरान भगवान को फल, फूल और मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद शुद्ध देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। भगवान की पूजा के बाद तुलसी जी की पूजा अवश्य करें। इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को दान देना चाहिए। दान में कपड़े और अन्न दे सकते हैं। जो लोग व्रत नहीं रखते, उन्हें भी इस दिन चावल खाने से बचना चाहिए।

 

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वरुथिनी एकादशी के दिन क्या न करें

दिन में न सोएं - व्रत रखने वाले लोगों को दोपहर में सोने से बचना चाहिए।
नकारात्मक भाषा का प्रयोग न करें - इस दिन गुस्सा करने और झूठ बोलने से बचें।
तामसिक भोजन न करें - लहसुन, प्याज, मांस और शराब से दूर रहें।
चावल न खाएं -जो लोग व्रत नहीं रखते, उन्हें भी चावल खाने से बचना चाहिए।
तुलसी के पत्ते न तोड़ें - इस दिन तुलसी जी की पूजा की जाती है इसलिए पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।

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