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लइराई जात्रा: देवी की कृपा के लिए अंगारों पर चलते हैं भक्त

गोवा के शिरगांव में स्थित लइराई देवी मंदिर में सालाना जात्रा का खास महत्व रहता है। आइए जानते हैं क्या है यह जात्रा और सका इतिहास।

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लइराई जात्रा की सांकेतिक चित्र।(Photo Credit: AI Image)

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गोवा में स्थित शिरगांव लइराई देवी की सालाना जात्रा में मची भगदड़ में 7 लोगों कि मृत्यु हो गई और 80 से ज्यादा लोग घायल हो गए। बता दें कि शिरगांव अपनी इस जात्रा के लिए प्रसिद्ध है। यह उत्सव हर साल वैशाख शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है और इसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस जात्रा की विशेषता 'धोंड' नाम की परंपरा है, जिसमें भक्तों द्वारा जलते अंगारों पर नंगे पांव चलना होता है, जिसे 'होमखंड' कहा जाता है।

लइराई देवी और सात बहनों की कथा

स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, सात बहनें और एक भाई एक हाथी पर सवार होकर गोवा आए थे। वे सभी मयेम गांव पहुंचे, जहां हाथी की एक मूर्ति आज भी देखी जा सकती है। बड़ी बहन केलबाई ने अपने भाई खेतोबा को आग लाने भेजा लेकिन जब वह देर से लौटा, तो लइराई उसे ढूंढने गईं। उन्होंने खेतोबा को खेलते हुए पाया और क्रोधित होकर उसे लात मार दी। इससे आहत होकर खेतोबा वैंगुइनिम गांव चला गया। इस घटना से दुखी होकर केलबाई ने मुलगांव में तपस्या की और लइराई ने शिरगांव में जाकर प्रायश्चित स्वरूप अंगारों पर चलने का संकल्प लिया। उनके साथ उनके अनुयायी 'धोंड' भी थे।

 

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शिरगांव की लइराई जात्रा

लइराई देवी का मंदिर शिरगांव के मध्य में स्थित है, जहां देवी को कलश के रूप में पूजा जाता है। मंदिर की दीवारों पर एक 240 वर्ष पुराना चित्र है, जिसमें देवी को हरी साड़ी में कलश के भीतर चित्रित किया गया है। यह चित्र राजा रवि वर्मा की शैली से मिलता-जुलता है, लेकिन उससे भी पुराना है।

 

जात्रा के दौरान, 'धोंड' नाम के भक्त एक महीने तक शाकाहारी भोजन करते हैं और शुद्धता का पालन करते हैं। वे मोगरे के फूलों की माला पहनते हैं और 'बेट' नामक लकड़ी की छड़ी लेकर चलते हैं। रात में, मंदिर के पास एक विशाल अग्निकुंड जलाया जाता है और सुबह के समय, 'धोंड' जलते अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं। यह क्रिया देवी लइराई के प्रति उनकी भक्ति और तपस्या का प्रतीक है।

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

शिरगांव गांव में किसी प्रकार की हिंसा नहीं होती है और वहां मांसाहार वर्जित है। गांव के भीतर घोड़ों का प्रवेश भी प्रतिबंधित है। यह गांव देवी लइराई की पूजा और उनके प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। लइराई जात्रा न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह गोवा की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी उदाहरण है।

 

Disclaimer- यहां दी गई सभी जानकारी सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं।

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