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माघ पूर्णिमा कब है? व्रत के नियम, शुभ मुहूर्त और मान्यताएं

माघ पूर्णिमा हिंदू धर्म में पवित्र स्नान, दान और भगवान विष्णु की अराधना का महाकुंभ है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति पर भगवान की कृपा बनी रहती है।

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माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को 'माघ पूर्णिमा' या 'माघी पूर्णिमा' कहा जाता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, इस दिन स्वयं देवता स्वर्ग से उतरकर पृथ्वी पर गंगा स्नान के लिए आते हैं, इसलिए प्रयागराज और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का अनंत महत्व है। इस दिन दान-पुण्य करने से न केवल सुख-समृद्धि मिलती है, बल्कि पूर्वजों का आशीर्वाद भी मिलता है।

 

धार्मिक दृष्टि से यह दिन कल्पवास की पूर्णाहुति का समय होता है। श्रद्धालु पूरे एक महीने तक संगम के किनारे कठिन व्रत और साधना करते हैं और माघ पूर्णिमा के अंतिम स्नान के साथ अपने व्रत का समापन करते हैं। भगवान सत्यनारायण की कथा और चंद्र देव की पूजा इस दिन के आध्यात्मिक लाभ को कई गुना बढ़ा देती है।

 

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माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी 2026 को दोपहर 1:25 बजे शुरू होगी और 2 फरवरी 2026 को सुबह 11:10 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार व्रत और स्नान 2 फरवरी 2026 सोमवार को किया जाएगा। इस दिन स्नान का शुभ समय यानी ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:24 बजे से 6:15 बजे तक रहेगा। 

व्रत के नियम 

  • पूर्णिमा के दिन मन, वचन और कर्म से शुद्धता बनाए रखें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। 
  • इस दिन प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन का त्याग करें। संभव हो तो फलाहार व्रत रखें।
  • व्रत के दौरान ज्यादा बोलने के बजाय पूजा और ध्यान पर जोर दें। 
  • रात में चंद्रमा को दूध और जल का अर्घ्य जरूर दें, इससे मन को शांति मिलती है।

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प्रमुख मान्यताएं और परंपराएं

माना जाता है कि इस दिन प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर स्नान करने से 'अश्वमेध यज्ञ' के समान फल मिलता है। साथ ही माघ पूर्णिमा पर तर्पण करने से पूर्वजों को तृप्ति मिलती है और परिवार में पितृ दोष शांत होता है। इस दिन तिल और काले कंबल का दान करना बेहद शुभ माना गया है।

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