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मंत्र के बाद 3 बार बोलें ‘ॐ शांति’, जीवन में आएगा बड़ा बदलाव

हिंदू धर्म में मंत्रोच्चारण के बाद तीन बार ‘ॐ शांति’ का उच्चारण किया जाता है, जिसका अपना एक आध्यात्मिक महत्व है।

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ध्यान में ॐ शांति का विशेष महत्व। (Pic Credit- Creative Image)

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सनातन धर्म में कई ऐसी परंपराएं हैं, जिनका अपना एक विशेष महत्व और अर्थ है। धर्म शास्त्रों में विभिन्न मंत्र और स्तोत्र का उल्लेख किया गया है। मान्यता है कि देव पूजा के दौरान इन मंत्रों का पाठ करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता हैं। इसके साथ पूजा में भाग लेने के दौरान अपने सुना होगा कि पुरोहित किसी भी मंत्रोच्चार के अंत में विशेष रूप से स्वस्ति वाचन के अंत में ‘ॐ शांति, ॐ शांति, ॐ शांति’ का उच्चारण भी करते हैं। बता दें कि इस परंपरा से गहरी मान्यता और महत्व है।

क्या है त्रिवरम सत्यम्?

‘त्रिवरम सत्यम्’ का अर्थ है कि किसी बात को तीन बार दोहराने से वह सत्य और प्रभावशाली हो जाती है। यह विश्वास केवल धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन में भी देखा जाता है, जैसे किसी बात पर जोर देने के लिए उसे तीन बार कहना। महाभारत ग्रंथ में इसका उल्लेख मिलता है कि किसी वचन की पुष्टि करने के लिए उसे तीन बार कहा जाना चाहिए, जिससे वह सभी के लिए मान्य हो जाए।

 

सनातन परंपरा में तीन, जिसे संस्कृत में ‘त्रि’ कहते हैं, का विशेष महत्व है। जैसे त्रिदेव- भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव। इन तीनों देवताओं को सृष्टि के सृजन, पालन और विनाश का प्रतीक माना जाता है। साथ ही ये तीन काल- भूत, वर्तमान और भविष्य काल को भी दर्शाता है। 

तीन बार ॐ शांति कहने का कारण

शास्त्रों में यह वर्णित हैं कि मनुष्य की समस्याएं तीन प्रकार की होती हैं। पहला, अधिभौतिक कष्ट जिसमें प्राकृतिक आपदाएं, जैसे- बाढ़, भूकंप, या तूफान शामिल हैं। दूसरा, आधिदैविक कष्ट जिसमें दैवीय या अदृश्य शक्तियों से उत्पन्न समस्याएं हैं। तीसरा, आध्यात्मिक कष्ट जिसमें हमारी आंतरिक, मानसिक और शारीरिक परेशानियां, जैसे क्रोध, डर, या तनाव शामिल हैं। इसलिए शांति पाठ या स्वस्तिवाचन के बाद ‘ॐ शांति’ का तीन बार उच्चारण करने से ये तीनों समस्याओं से लड़ने की ऊर्जा मिलती है और इससे सकरात्मकता का संचार होता है।

 

बता दें कि तैत्तिरीय उपनिषद में, ऋग्वेद और यजुर्वेद में, श्रीमद्भगवद्गीता के साथ-साथ पतंजलि योगसूत्र में ‘ॐ शांति’ मंत्र के महत्व का वर्णन किया गया है। इनमें कहा गया है कि ‘ॐ शांति’ कहने से हमारे मन, वाणी और कर्म को शांति और संतुलन मिलता है।  यह परंपरा न केवल आध्यात्मिकता का प्रतीक है, बल्कि इसे जीवन में शांति और संतुलन बनाए रखने के तरीके के रूप में भी देखा जाता है।

 

Disclaimer- यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। Khabargaon इसकी पुष्टि नहीं करता।


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