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क्यों श्रीकालहस्ती मंदिर को कहा जाता है 'दक्षिण का काशी', ये है वजह

आंध्र प्रदेश राज्य में स्थित भगवान शिव के प्राचीन तीर्थस्थल को दक्षिण का काशी कहा जाता है। आइए जानते हैं क्या है इस स्थान का महत्व और यहां से जुड़ी मान्यताएं।

Image of SriKalahasti Mandir in Andhra Pradesh

श्री कालहस्ती मंदिर।(Photo Credit: Incredible India)

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देश के विभिन्न हिस्सों में भगवान शिव के कई पौराणिक और प्राचीन मंदिर स्थापित हैं, जिनसे जुड़ी कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे ही कई धार्मिक स्थल दक्षिण भारत में भी स्थित हैं। इन्हीं में से एक मंदिर श्री कालहस्ती मंदिर है, जिसे दक्षिण का काशी कहा जाता है। यह तीर्थस्थल भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में स्थित एक प्राचीन और पवित्र मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और अपनी विशेष धार्मिक मान्यता, वास्तुकला के लिए विशेष महत्व रखता है।

श्री कालहस्ती मंदिर की पौराणिक मान्यता

इस मंदिर का नाम तीन भक्त प्राणियों – 'श्री' (सांप), 'काल' (कौआ), और 'हस्ती' (हाथी) के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। मान्यता है कि इन तीनों ने अलग-अलग रूपों में भगवान शिव की भक्ति की और शिव ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।

 

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साथ ही यह मंदिर वायुपुराण में वर्णित पंचभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) लिंगों में से एक 'वायु लिंग' का निवास स्थान है। कहा जाता है कि यहां स्वयं वायु (हवा) के रूप में भगवान शिव का वास है।

रहस्यमय महत्व और पूजा का विशेष स्थान

श्री कालहस्ती मंदिर का विशेष महत्व राहु और केतु ग्रहों की शांति के लिए की जाने वाली पूजा से जुड़ा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि कोई व्यक्ति यदि राहु-केतु दोष से पीड़ित है या जीवन में कोई ग्रह बाधा उत्पन्न हो रही है, तो इस मंदिर में की गई पूजा उनके कष्टों का निवारण करती है।

 

यहां विशेष रूप से 'राहु-केतु शांति पूजा' की जाती है, जिसे करने से कुंडली में ग्रह दोषों का प्रभाव कम हो जाता है। इस पूजा को विशेष रूप से चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय करने पर अत्यधिक लाभ मिलता है। यह भी मान्यता है कि इस मंदिर में नंदी की मूर्ति से शिवलिंग तक किसी भी प्रकार की छाया नहीं पड़ती, जो इसे और भी रहस्यमय और चमत्कारी बनाता है।

 

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दक्षिण का काशी क्यों कहा जाता है?

वाराणसी को काशी कहा जाता है, जहां भगवान शिव का मुख्य ज्योतिर्लिंग स्थित है। उसी प्रकार, दक्षिण भारत में श्री कालहस्ती मंदिर को उतनी ही श्रद्धा से देखा जाता है, इसलिए इसे 'दक्षिण का काशी' कहा जाता है। यहां भगवान शिव के वायु लिंग की पूजा होती है, जो दुर्लभ पंचभूत लिंगों में से एक है। इसके अलावा, ऐसी भी मान्यता है कि काशी की तरह ही इस स्थान पर मृत्यु प्राप्त करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 

Disclaimer- यहां दी गई सभी जानकारी सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। Khabargaon इसकी पुष्टि नहीं करता।

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