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क्यों जरूरी हैं हज यात्रा के ये 7 नियम? हर स्टेप का मतलब समझिए

हज यात्रा मुस्लिम धर्म में सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक है। इस्लामिक मान्यता के मुताबिक, इस हज की यात्रा के दौरान कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- sora

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इस्लाम धर्म में हज यात्रा का विशेष महत्व है, इसी वजह से हर साल करोड़ों लोग हज यात्रा पर जाते हैं। भारत से भी 18 अप्रैल से हजारों की तादाद में लोग हज यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं। हज यात्रा में लोगों को 7 नियमों का पालन करना चाहिए क्योंकि कहा जाता है कि इन नियमों का पालन न करने से यात्रा अधूरी मानी जाती है।

 

हज यात्रा के दौरान लोग सऊदी अरब के मक्का शहर जाते हैं और सबसे पवित्र स्थल काबा के दर्शन करते हैं। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, हज की यात्रा में पहले केवल विवाहित लोग अपने साथी के साथ जाते थे लेकिन पिछले कुछ सालों में महिलाएं अपने पति के बिना भी हज यात्रा पर जा रही हैं। इस्लामिक मान्यता के अनुसार, जो लोग आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रूप से सक्षम हैं, उन्हें हज की यात्रा करनी चाहिए। अब सवाल उठता है कि इस तीर्थ यात्रा के 7 नियम क्या हैं, जिनका पालन करना चाहिए।

 

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हज यात्रा के 7 नियम क्या हैं?

हज यात्रा के दौरान पूरी दुनिया के मुसलमान कुछ खास नियमों का पालन करते हैं। इन नियमों में बताया गया है कि हज की यात्रा किस तरह करनी चाहिए। आइए समझते हैं एक-एक नियम और उनके अर्थ।


1. एहराम -हज यात्रा में हर व्यक्ति को बिना सिला हुआ, सिर से पांव तक सफेद कपड़ा पहनना चाहिए। इस्लाम में एहराम पहनने के बाद व्यक्ति को झूठ बोलना, चोरी करना, किसी को परेशान करना जैसे कार्य नहीं करने चाहिए। मान्यता है कि एहराम पहनने के बाद व्यक्ति पाक हो जाता है।


2. मीना में रात बिताना - हज यात्रा के दौरान लोगों को सऊदी अरब के मीना में जरूर ठहरना चाहिए। यहां रात बिताकर अल्लाह की इबादत की जाती है और दुआ मांगी जाती है।


3. अराफात पर माफी मांगना -अराफात सऊदी अरब का एक पर्वत है, जो मीना से लगभग 14 किलोमीटर दूर है। यहां पहुंचने के बाद सभी लोग अल्लाह से अपने बुरे कर्मों के लिए

 माफी मांगते हैं। मान्यता है कि अराफात में दुआ करने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है।

 

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4. कंकड़ इकट्ठा करना - अराफात के बाद लोग मुजदलिफा पहुंचते हैं और वहां रात बिताते हैं। परंपरा के मुताबिक, यहां सभी तीर्थयात्री शैतान को प्रतीकात्मक रूप से मारने के लिए कंकड़ इकट्ठा करते हैं।


5. शैतान को कंकड़ मारना - कंकड़ इकट्ठा करने के बाद लोग वापस मीना जाते हैं, जहां जमरात के तीन स्तंभों में सबसे बड़े स्तंभ पर कंकड़ मारे जाते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए लोग बुराइयों पर जीत का प्रतीक दर्शाते हैं।


6. कुर्बानी - हज यात्रा में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। इसके अलावा पुरुष अपने बाल मुंडवाते हैं या छोटे करवाते हैं, जो त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।


7. काबा के चक्कर लगाना - हज यात्रा का आखिरी पड़ाव काबा के चक्कर लगाना होता है। इसमें सभी लोग काबा के 7 चक्कर लगाते हैं, जिसे तवाफ कहा जाता है। यह अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण और एकता का प्रतीक है।

 

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।


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