अप्रैल महीने के पहले हफ्ते में ईसाई धर्म के खास त्योहारों की शुरुआत हो गई है। जहां 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे मनाया जाता है, वहीं इसके बाद 5 अप्रैल को ईस्टर संडे का त्योहार मनाया जाएगा। ये त्योहार एक तरफ त्याग और दूसरी तरफ पुनर्जन्म का प्रतीक हैं। एक ओर गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था इसलिए इसे उत्सव के बजाय शोक और प्रार्थना के रूप में मनाया जाता है। वहीं दूसरे ओर ईस्टर संडे को उत्सव के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इस दिन ईसा मसीह का पुनर्जन्म हुआ था, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक ईसा मसीह सूली पर इसलिए चढ़े थे ताकि लोग ईश्वर के मार्ग पर वापस आ सकें। गुड फ्राइडे के दिन ज्यादातर लोग चर्च में जाकर प्रार्थना करते हैं। अब सवाल उठता है कि किस तरह ईसाई धर्म के लोग गुड फ्राइडे और ईस्टर संडे का त्योहार मनाते हैं।
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किस तरह मनाते हैं गुड फ्राइडे?
ईसाई धर्म की मान्यता के अनुसार गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच सूली पर चढ़ाया गया था, जिस दौरान उन्होंने अत्यधिक शारीरिक पीड़ा झेली थी, इस वजह से आज के दिन कई भक्त 12 बजे से 3 बजे तक चर्च में प्रार्थना करने वाले हैं।
कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं तो कई पूरे दिन ईसा मसीह की प्रार्थना में लीन रहते हैं। गुड फ्राइडे के दिन कोई भी 'हैप्पी गुड फ्राइडे' नहीं कहते है क्योंकि यह खुशी का नहीं बल्कि शोक का दिन होता है।
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ईस्टर संडे कैसे मनाया जाता है?
जहां गुड फ्राइडे शोक और शांति का पर्व है, वहीं ईस्टर संडे खुशियों और उत्सव से भरा त्योहार होता है। इस दिन लोग सुबह चर्च जाकर कैंडल जलाते हैं और बाइबल पढ़ते हैं। ईस्टर संडे के दिन रंग-बिरंगे अंडों को ईसा मसीह के पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता है। इसलिए लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को अंडे गिफ्ट के रूप में देते हैं। शाम को कई लोग अपने-अपने घर पर पार्टी रखते हैं, जहां सभी दोस्त और रिश्तेदार मिलकर स्वादिष्ट पकवानों का आनंद लेते हैं। इस दिन सभी लोग एक-दूसरे को 'हैप्पी ईस्टर' विश करते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।