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इस्लाम धर्म में मृत्यु के बाद सिर्फ 3 दिन क्यों मनाया जाता है शोक, जानिए वजह

इस्लाम धर्म में किसी परिवार के किसी व्यक्ति के मरने के बाद शोक 3 दिन मनाया जाता है। इसके पीछे इस्लामिक मान्यता क्या है, जानिए।

Why is mourning observed for only 3 days after someone’s death in Islam

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit - Gemini

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इस्लाम धर्म में मृत्यु को जीवन का अंत नहीं माना जाता है, बल्कि मृत्यु को आत्मा की शरीर से मुक्ति माना जाता है। इस्लामिक जानकारों के मुताबिक, मृत्यु के बाद व्यक्ति अल्लाह के पास जाता है, जहां वह एक नए जीवन की शुरुआत करता है। इस्लाम धर्म में मृत्यु को एक जन्म के अंत और दूसरे जीवन की शुरुआत माना जाता है। इसी वजह से इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार अपने परिजन की मृत्यु के बाद ज्यादा शोक नहीं मनाना चाहिए। इस्लामिक जानकारों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति को अपने परिजन की मौत के बाद सिर्फ 3 दिन शोक मनाना चाहिए।

 

इस्लाम धर्म में किसी के मरने पर तीन दिन से ज्यादा रोना अशुभ माना जाता है। हालांकि, एक तरफ जहां सभी लोगों के लिए 3 दिन तक ही शोक मनाने का नियम है, वहीं दूसरी तरफ यह भी माना जाता है कि अगर किसी महिला के पति की मृत्यु हो जाए, तो उसे 4 महीने 10 दिनों तक शोक मनाना चाहिए। अब शोक मनाने की इस परंपरा के पीछे वजह क्या है, जानिए।

 

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इस्लाम धर्म में अंतिम संस्कार की परंपरा

इस्लाम धर्म में जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो ज्यादा रोने-धोने की मान्यता नहीं है, हालांकि लोग अपने प्रियजनों की मृत्यु के बाद रोते हैं। इस्लामिक परंपरा के मुताबिक, व्यक्ति के मरने के बाद उसके परिवार के लोग जल्द से जल्द शव को दफनाते हैं। इसके बाद व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए पूरा परिवार, रिश्तेदार और दोस्त एक साथ बैठकर नमाज पढ़ते हैं, जिसे सलातुल जनाजा कहा जाता है। सलातुल जनाजा के जरिए व्यक्ति के पापों के लिए अल्लाह से माफी मांगी जाती है। यह नमाज अंतिम संस्कार के बाद अदा की जाती है।

 

सिर्फ 3 दिन शोक क्यों मनाया जाता है

 

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की मृत्यु पर उसके परिवार के लिए शोक की अवधि अधिकतम तीन दिन तय की गई है। इस्लाम धर्म में यह भी बताया गया है कि कोई भी महिला किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद 3 दिन से ज्यादा शोक या मातम मनाती है, तो वह जायज नहीं माना जाता। मुस्लिम महिलाएं सिर्फ अपने पति के मरने पर 4 महीने 10 दिन का शोक मना सकती हैं।

 

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी व्यक्ति का मरना अल्लाह की मर्जी होती है। इस्लाम में लोगों का जीवन और मृत्यु का चक्र अल्लाह के हाथों में है। इसी वजह से माना जाता है कि किसी के मरने पर ज्यादा शोक मनाना सही नहीं है। इसके बजाय लोगों को अल्लाह की इबादत करनी चाहिए और जल्द ही अपनी दैनिक जिम्मेदारियों की ओर बढ़ना चाहिए। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, लंबे समय तक शोक मनाने से व्यक्ति चिंता या तनाव का शिकार हो सकता है

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