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नीदरलैंड्स के सामने तो चल गया... सुपर-8 में यह गलती मत करना टीम इंडिया!

भारतीय टीम ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में चारों ग्रुप स्टेज मैच जीत लिए हैं लेकिन फील्डिंग में प्रदर्शन ठीक नहीं रहा है। टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा कैच टपकाने के मामले में टीम इंडिया दूसरे नंबर पर है।

Shivam Dube Surya Hardik Pandya

नीदरलैंड्स के खिलाफ मैच के दौरान चर्चा करते शिवम दुबे, कप्तान सूर्यकुमार यादव और हार्दिक पंड्या, Photo Credit: PTI

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ICC टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया का विजयरथ जारी है। भारतीय टीम ने सुपर-8 से पहले अपने आखरी ग्रुप स्टेज मुकाबले में बुधवार (18 फरवरी) को नीदरलैंड्स को 17 रन से हरा दिया। मेजबान टीम ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया और धीमी शुरुआत से उबरकर 193/6 का बड़ा स्कोर खड़ा किया, जिसमें शिवम दुबे और हार्दिक पंड्या का अहम रोल रहा। 

 

पांचवें नंबर पर उतरे शिवम दुबे ने 212.90 के स्ट्राइक रेट से 66 रन ठोके। उन्होंने 31 गेंद का सामना किया और 4 चौके और 6 छक्के उड़ाए। वहीं हार्दिक ने 21 गेंद में 3 छक्कों की मदद से 30 रन बनाए। दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 35 गेंद में 76 रन की साझेदारी हुई, जिसने भारत को उस स्कोर तक पहुंचाया, जहां तक नीदरलैंड्स के लिए पहुंचना नामुमकिन साबित हुआ। डच टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए 7 विकेट खोकर 176 रन ही बना पाई।

 

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सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने चारों ग्रुप स्टेज मैच जीतकर सुपर-8 में शान से कदम रखा है लेकिन फील्डिंग उसके लिए चिंता का सबब बना हुआ है। नीदरलैंड्स के खिलाफ टीम इंडिया ने 5 कैच टपकाए। यह उतना महंगा नहीं पड़ा लेकिन सुपर-8 में ऐसी एक भी गलती जीता-जिताया मैच हरवा सकती है।

 

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कैच छोड़ने में नामीबिया से भी बुरा हाल

भारतीय टीम ने इस टी20 वर्ल्ड कप में अब तक 9 कैच टपकाए हैं। टूर्नामेंट में भाग ले रही 20 टीमों में सिर्फ आयरलैंड (10) ने ही भारत से ज्यादा कैच छोड़े हैं। इस लिस्ट में नामीबिया (6) तीसरे नंबर पर है। 

 

टीम इंडिया का नामीबिया जैसी एसोसिएट टीमों से ज्यादा कैच टपकाना चिंतनीय है। ऐसा इसलिए, क्योंकि एसोसिएट टीमों के पास फ्लड लाइट में खेलने का बेहद कम अनुभव है। वहीं भारतीय खिलाड़ी डे-नाइट/नाइट मैच खेलते हुए बड़े हुए हैं। तिस पर से वे दुनिया के सबसे फिट क्रिकेटर्स में गिने जाते हैं। ऐसे में कैचिंग में खराब प्रदर्शन अस्वीकार्य है। कुछ कैच मुश्किल जरूर रहे हैं लेकिन अगर सुपर-8 या नॉकआउट में इन मौकों को नहीं भुनाया गया तो टाइटल डिफेंस का सपना अधूरा रह सकता है।


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