तमिलनाडु राज्य के ईरोड जिले में एक 12 वर्षीय बच्चे मौलीश के माता-पिता ने अपने बेटे की मौत के बाद उसके अंगों का दान करने का बड़ा फैसला लिया, जिससे पांच लोगों को नया जीवन मिला है। ईरोड के करुंगलपालयम निवासी प्रभु के बेटे मौलीश को पिछले कुछ समय से दौरे पड़ने की बीमारी थी। हालत बिगड़ने पर उसे ईरोड के सेंथिल मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
डॉक्टरों की काफी कोशिशों के बाद भी उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और उसे 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया गया। इस दुखद घड़ी में मौलीश के माता-पिता ने हिम्मत दिखाते हुए अपने बेटे के अंग दान करने का फैसला लिया, ताकि दूसरों की जान बचाई जा सके।
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जब डॉक्टरों ने परिवार को जानकारी दी कि मौलीश अब ठीक नहीं हो सकता, तब परिजनों ने 'ट्रांसप्लांट अथॉरिटी ऑफ तमिलनाडु' (TRANSTAN) के नियमों के तहत अंगदान की लिखित अनुमति दी। अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों की विशेष टीम ने इस फैसले का सम्मान करते हुए तुरंत अंग निकालने और उन्हें जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी की।
बचाई गईं पांच जानें
मौलीश के शरीर से लीवर, दोनों किडनी और त्वचा को सुरक्षित निकाला गया। एक किडनी ईरोड जिले के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को दी गई। लीवर और दूसरी किडनी को तुरंत कोयंबटूर के एक अस्पताल में भेजा गया ताकि वहां इंतजार कर रहे मरीजों का समय पर ट्रांसप्लांट किया जा सके। इसके अलावा, बच्चे की त्वचा को भी कोयंबटूर के एक अस्पताल के स्किन बैंक में दान किया गया।
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डॉक्टरों ने की तारीफ
सेंथिल अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ.सी.सेंथिलवेल और उनकी टीम ने मौलीश के माता-पिता के इस नेक काम की प्रशंसा की है। डॉक्टरों का कहना है कि सही समय पर लिया गया यह फैसला पांच लोगों के लिए जीवनदान साबित हुआ है। ईरोड में इस घटना की काफी चर्चा हो रही है क्योंकि एक छोटे बच्चे के अंगों के दान से कई परिवारों में फिर से खुशियां लौट आई हैं।