महाराष्ट्र के पुणे में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव होने वाले हैं। इस बार के चुनाव में प्रचार का एक अनोखा तरीका निकाला गया है जिसकी बहुत चर्चा हो रही है। हाल ही में विमान हादसे में जान गंवाने वाले नेता अजीत पवार के नेतृत्व वाली NCP ने प्रचार के लिए 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) का सहारा लिया है। उनकी कमी को पूरा करने के लिए पार्टी ने अपने दिवंगत नेता की आवाज और हुबहू दिखने वाले वीडियो क्लिप्स जारी किए हैं। इन क्लिप्स के जरिए पार्टी घर-घर जाकर वोटरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
ये वीडियो और ऑडियो मैसेज सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। करीब 2 से 3 मिनट के इन वीडियो में अजीत पवार की आवाज सुनाई देती है, जिसमें वे चुनाव के लिए चुने गए उम्मीदवारों के बारे में बात कर रहे हैं।
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अजीत पवार की आवाज
पार्टी की ओर से जारी इन वीडियो में अजीत पवार उम्मीदवारों से अपना विजन शेयर करते नजर आ रहे हैं। साथ ही इन क्लिप्स के जरिए वोटरों से भावुक अपील की जा रही है कि वे उन चेहरों को जिताएं जिन्हें उनके चहेते नेता ने 'भरोसेमंद' माना था।
इस पर पार्टी ने कहा कि अजीत पवार का ग्रामीण इलाके में बहुत गहरा प्रभाव था। लोग उन्हें न केवल एक राजनेता बल्कि ग्रामीण विकास के मसीहा के तौर पर देखते थे। चुनाव से ठीक पहले उनकी आवाज सुनकर कई ग्रामीण भावुक हो रहे हैं।पार्टी का मानना है कि उनकी कमी को महसूस कर रहे वोटरों के बीच सहानुभूति और पुरानी यादों को ताजा करने का यह सबसे प्रभावी तरीका है।
वीडियो पर विवाद
प्रचार के इस 'हाई-टेक' तरीके ने राजनीतिक हलकों में विवाद भी पैदा कर दिया है। शिवसेना के उम्मीदवार श्रीनाथ लांडे ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हालांकि क्षेत्र में दिवंगत नेता के प्रति सभी का सम्मान है लेकिन चुनाव जीवित लोगों के बीच होना चाहिए, न कि मृतकों की आवाजें बनाकर।
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विरोधियों का कहना है कि यह जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है, खासकर तब जब उनकी मौत का दुख अभी ताजा है। फिलहाल, पुणे के इस चुनाव में तकनीक और भावनाओं के इस अनोखे मेल ने पूरे महाराष्ट्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
कई लोगों का मानना है कि किसी मृत व्यक्ति की आवाज को मशीनों के जरिए दोबारा बनाना और उसे चुनाव में इस्तेमाल करना नैतिक रूप से गलत है।