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कभी तेज, कभी निशांत, कभी CM से पंगा, पूर्व IPS अमिताभ दास की कहानी क्या है?

रिटायर्ड IPS अमिताभ दास अपने विवादित बयानों की वजह से अक्सर चर्चा में रहते हैं। कहा जा रहा है कि गिरफ्तार हुए हैं लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है।

Amitabh Das

रिटायर्ड IPS अधिकारी अमिताभ दास। Photo Credit: Social Media

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पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ दास के घर पुलिस ने देर रात शुक्रवार को रेड की है। उनका घर, पाटलिपुत्र कॉलोनी के पास पटना स्काइज अपार्टमेंट है। पुलिस के कई जवान वहां पहुंचे और घर में छापेमारी शुरू कर दी। रेड के दौरान ही अमिताभ दास की तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें रूबन अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

छापेमारी में पुलिस ने अमिताभ दास का फोन, टैब, अशोक स्तंभ वाले लेटर जब्त किया है। अमिताभ दास ने कुछ दिन पहले शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के साथ हुए रेप और हत्या से जुड़े कुछ सवाल किए थे। उन पर आरोप है कि वह भ्रामक और उत्तेजक पोस्ट डाल रहे थे। 3 थानों की पुलिस ने मिलकर उनके घर रेड डाली।  अमिताभ दास ने आरोप लगाया है कि उन्हें मारने की कोशिश की जा रही है। 

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क्यों अमिताभ दास के घर हुई रेड?

अमिताभ दास के खिलाफ यह कार्रवाई एक FIR के बाद हुई है। अमिताभ दास पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने जहानाबाद की एक 18 साल की मेडिकल कैंडिडेट की संदिग्ध मौत के सिलसिले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गुमराह करने वाला और भड़काऊ कंटेंट पोस्ट किया था। मृत छात्रा पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में रह रही थी। अमिताभ दास ने इस मामले में खुलेआम DNA टेस्टिंग की मांग की थी। पुलिस ने कहा कि छापेमारी और जब्ती संवेदनशील मामले से जुड़े भड़काऊ ऑनलाइन कंटेंट की वजह से हुई थी। 

ऐसा क्या कहा था जो इतने बुरे फंसे?

NEET में छात्रा की मौत पर अमिताभ दास ने कहा था कि इस केस में सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का डीएनए टेस्ट होना चाहिए। उन्होंने सीएम आवास में रहने वाले लोगों के डीएनए सैंपल मांगे थे। उनके इस बयान की खूब आलोचना हुई थी। जन शक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने कहा था कि वह कुछ भी बोलते हैं, उन्हें पहले ही गिरफ्तार कर लेना चाहिए था। 

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पटना पुलिस ने क्या कहा है?

पटना SSP कार्तिकेय के शर्मा ने कहा कि अमिताभ दास के बीमार होने की शिकायत के बाद उनके घर की तलाशी ली गई। उन्हें गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया। अलग-अलग सोशल प्लेटफॉर्म पर उनके बदनाम करने वाले बयानों के लिए तलाशी ली गई। यह पॉक्सो नियमों के भी खिलाफ था। तलाशी के दौरान, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कुछ लेटर पैड जब्त किए गए।     

NEET केस है क्या, जिसे लेकर बोल रहे थे अमिताभ दास?

पटना में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत हुई थी। अब इस केस की जांच CBI कर रही है। छात्रा जहानाबाद की रहने वाली थी और नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी। छात्रा 6 जनवरी को पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित एक महिला छात्रावास में बेहोश पाई गई थी। बाद में वह कोमा में चली गई और 5 दिन बाद एक प्राइवेट अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया था। छात्रा की मौत के बाद मचे राजनीतिक हंगामे की वजह से बिहार सरकार ने 31 जनवरी को मामला CBI को सौंप दिया। परिजनों ने पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया है। पीड़िता के परिवार ने अधिकारियों पर मामले को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है। अमिताभ दास इसे लेकर वह सरकार को घेर रहे हैं।

 

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कौन हैं रिटायर्ड IPS अमिताभ दास?

अमिताभ दास, उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्हें जबरिया रिटायर किया गया है। वह साल 1994 बैच के IPS हैं।  उनका आखिरी पद पलिस अधीक्षक सह सहायक नागरिक सुरक्षा आयुक्त रहा है। उन्होंने सरकार पर राजनीति से प्रेरित होकर रिटायर करने के आरोप लगाए थे। अमिताभ दास पर एक महिला के यौन शोषण के आरोप भी लग चुके हैं, जिसकी वजह से 10 साल वह कानूनी पचड़े में फंसे रहे। साल 2016 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी। साल 2018 में उन्हें जबरिया रिटायरमेंट दे दी गई थी। 

अमिताभ दास की परेशानी क्या है?

अमिताभ दास अपने विवादित बयानों की वजह से अक्सर चर्चा में रहते हैं। जब से वह रिटायर हुए हैं, यूट्यूब पर खूब सक्रिय हैं। वह राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। बिहार कैडर के अधिकारी रहे अमिताभ, सरकार को हर मुद्दे पर घेरते हैं।  अमिताभ दास तेज प्रताप यादव से लेकर निशांत कुमार तक संगीन आरोप लगा चुके हैं। साल 2006 के एक मामले में एक महिला ने उन पर 8-9 साल तक यौन शोषण, शादी का झूठा वादा और छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। जांच हुई, उन्हें क्लीन चिट मिल गया। 

 

अमिताभ दास ने आरोप लगाया था कि बीजेपी नेताओं के संबंध रणवीर सेना से रहे। उन्होंने नक्सलियों से साठगांठ होने के भी आरोप लगाए थे। वह अपने ही विभाग के खिलाफ खूब बोलते थे, जिसके बाद सरकार ने उन्हें अयोग्य घोषित करके रिटायर कर दिया। अब उन पर राजकीय प्रतीक चिन्ह और IPS पदनाम के अवैध इस्तेमाल के भी आरोप लगे हैं। वह कई बार कानूनी पचड़ों में फंस चुके हैं।


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