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'UP पुलिस उठा ले गई और रजाई ओढ़ाकर पीटा', बजरंग दल के कार्यकर्ता ने लगाए आरोप

उत्तर प्रदेश के रायबरेली में बजरंग दल के जिला संयोजक ने पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद से वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ता धरना दे रहे हैं।

Bajrang Dal workers protest

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, Photo Credit: Social Media

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उत्तर प्रदेश के रायबरेली में बजरंग दल के जिला संयोजक ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विनोद मौर्या ने बताया कि पुलिस ने उन्हें आधी रात को घर से उठाया और थाने ले जाकर जमकर पिटाई की। उनका आरोप है कि पुलिस ने उन पर पहले तो जमकर थप्पड़ बरसाए और गालियां दी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें थाने ले जाकर रजाई ओढ़ाकर पीटा। उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस वालों ने अपशब्दों का प्रयोग करते गुए उनसे कहा कि तुम बहुत बड़े हिंदूवादी नेता बनते हो। मामला संगठन के लोगों तक पहुंचा तो बवाल मच गया। 

 

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला यूपी के सलोन थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस पर बजरंग दल के जिला संयोजक विनोद कुमार मौर्या के साथ मारपीट के गंभीर आरोप लगे हैं। विनोद आर्या ने पुलिस पर मारपीट के आरोप तो लगाए ही साथ में उनके परिवार के साथ दुर्व्यवहार के भी आरोप लगाए। इस मामले की खबर मिलते ही वीएचपी नेता धरने पर बैठ गए। आधी रात यूपी कैबिनेट में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी अपनी ही सरकार की पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठ गए। 

 

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पुलिस और संगठन कार्यकर्ताओं में सीधा टकराव

रायबरेली जिला मुख्यालय के डिग्री कॉलेज चौराहे पर देर रात बवाल मच गया। वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ता रात में ही धरने पर बैठ गए। वहीं, कैबिनेट मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के साथ-साथ ऊंचाहार विधायक मनोज पांडेय समेत भारतीय जनता पार्टी के कई नेता मौके पर धरने पर पहुंच गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया। प्रदर्शनकारी एसएचओ राघवन सिंह और एक अन्य सिपाही के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। मामला बढ़ता देख चौंकी इंचार्ड समेत तीन सिपाहियों को हटा दिया गया। 

 

मंत्री, विधायक धरने पर बैठे

आधी रात शुरू हुआ यह विवाद तब और ज्यादा बढ़ गया जब यूपी के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से बातचीत की उन्होंने अपर एएसपी से एसएचओ को लाइन हाजिर करने की बात कही और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकार के तहत वह अपने संगठन के साथियों के साथ खड़े गैं और दोषियों पर कार्रवाई जरूर होगी। अगले दिन समाजवादी पार्टी के बागी विधायक मनोज पांडेय भी धरने में शामिल हुए। 

 

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धरना जारी

मामले को बढ़ता देख पुलिस प्रशासन ने एसएचओ और तीन सिपाहियों को हटा दिया। हालांकि, इसके बावजूद भी वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ता अड़े हुए हैं। उनकी मांग है कि जह तक सलोन थाने के एसएचओ को लाइन हाजिर या सस्पेंड नहीं किया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। यह मामला अब उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुका है। 

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