देशभर में भीषण गर्मी का कहर जारी है। तापमान 45 डिग्री तक पहुंचने और हीटवेव के चलते लोग बीमार पड़ रहे हैं और जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इस भीषण गर्मी में भी राजस्थान के कुछ साधु-संत तपती धूप में आग जलाकर प्रदर्शन कर रहे हैं। 15 अप्रैल से चल रहा प्रदर्शन अब पूरे राज्य में चर्चा की वजह बना हुआ है और भैराणा धाम के संतों की खूब तारीफ हो रही है। इस प्रदर्शन की वजह पेड़ों को कटने से बचाने और इस इलाके में इंडस्ट्रियल जोन बनाने के विरोध में किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें वायरल हैं जिनमें धूल भरी जमीन पर उपले जलाकर उसके बीच में बैठे साधु-संत प्रदर्शन कर रहे हैं। इन लोगों का नारा है- 'रीको भगाओ, भैराणा धाम बचाओ।' अब इस प्रदर्शन को तमाम नेताओं और दलों का समर्थन मिल रहा है और मामला बढ़ता जा रहा है। दादू संप्रदाय के लोगों का कहना है कि भैराणा धाम उनकी आस्था का केंद्र है और यहां इंडस्ट्रियल जोन बनाकर धाम को खत्म नहीं किया जाना चाहिए।
कहां है भैराणा धाम?
राजस्थान की राजधानी जयपुर से किशनगढ़ जाने वाले रास्ते पर एक जगह पड़ती है दूद। दूदू से पहले ही फुलेरा की ओर जा रहे रास्ते से लगकर खड़ी पहाड़ियों के पास ही भैराणा धाम पड़ता है। राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इसी इलाके में इन्वेस्टमेंट जोन बनाने का एलान किया है। अब इलाके में बसे दादू संप्रदाय को मानने वाले लोगों का आरोप है कि हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं।
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अब दादू संप्रदाय के लोगों का कहना है कि यह जगह संत दादू की मोक्ष स्थली है और उनको मानने वाले लोग आज भी इस इलाके में रहते हैं। इतना ही नहीं, इन लोगों का यह भी कहना है कि इलाके में मौजूद सैकड़ों साल पुराने वन को भी काटा जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सैकड़ों साल पुराने पेड़ों और जंगलों को झाड़ी बताकर काटा जा रहा है और झाड़ी बताकर ही इनकी मंजूरी भी ली गई गई। संतों का कहना है कि अभी तक 30 हजार से ज्यादा पेड़ काटे जा चुके हैं जिसके चलते सैकड़ों प्रजातियों के वन्यजीवों के रहने की जगह नष्ट हो गई है।
सबसे पहले 5 अप्रैल को इस मामले में स्थानीय प्रशासन को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया गया था। 10 दिन में जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो 15 अप्रैल से इन साधु-संतों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसे 'अग्नि तप' का नाम दिया गया है। सामने आई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि तपती धूप में अपने चारों ओर उपले जलाकर बैठे साधु-संत प्रदर्शन कर रहे हैं। 330 एकड़ में फैले इस क्षेत्र में स्थानीय प्रजातियों के हजारों पेड़ भी मौजूद हैं और पहाड़ी क्षेत्र भी है।
आगे क्या होगा?
अब दादू मोदाचार्य गोपालदास महाराज का कहना है कि 2 मई तक तो यह प्रदर्शन जारी रहेगा। संत रतन के मुताबिक, 2 मई तक अग्नि तप होगा और इसके बाद आगे की रणनीति तय होगी। कहा जा रहा है कि 16 किलोमीटर में फैले पहाड़ की परिक्रमा का कार्यक्रम भी बन सकता है।
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इस मामले का हल निकालने के लिए राजस्थान के डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा भी भैराणा जा चुके हैं लेकिन संतों से उनकी बातचीत बेनतीजा साबित हुई। संतों का कहना है कि जब तक इन्वेस्टमेंट जोन बनाने की योजना रद्द नहीं की जाती तब तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा। 2 मई को यहां बड़ा प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी है।
क्या है दादू संप्रदाय की कहानी?
संत दादूदयाल की जन्म साल 1544 में हुआ था। साल 1603 में उनका देहावसान इसी भैराणा धाम में हुआ था। माना जाता है कि दादू संप्रदाय को मानने वाले लोगों के लिए यह जगह सबसे बड़ा तीर्थ है। भैराणा धाम के अलावा कई मंदिर भी ऐसे हैं जिनमें इसी संप्रदाय के लोग पूजा करते हैं।
इस संप्रदाय के साधु संत विवाह नहीं करते हैं और बच्चों को गोद लेकर अपना पंथ चलाते हैं। ये लोग अभिवादन के लिए नमस्ते की जगह 'सत्तराम' कहते हैं और इनके सत्संग को अलख-दरीबा कहा जाता है।