सुरक्षा को लेकर सतर्क हुई बिहार सरकार, बढ़ाए जा रहे डॉग स्क्वॉड
बिहार में डॉग स्क्वॉड को बढ़ाया जा रहा है। हाल ही में 30 नए डॉग्स को इस दस्ते में शामिल किया गया है जिसके बाद इनकी संख्या बढ़कर 96 हो गई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: AI Generated
संजय सिंह, पटना। बिहार पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में डॉग स्क्वॉड का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। हाल ही में विशेष रूप से प्रशिक्षित 30 नए डॉग्स को इस दस्ते में शामिल किया गया है, जिसके बाद अब राज्य में कुल प्रशिक्षित डॉग्स की संख्या बढ़कर 96 हो गई है। पहले यह संख्या 66 थी।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार इस स्क्वॉड में स्वीकृत पदों की संख्या 200 है। फिलहाल 96 प्रशिक्षित डॉग्स विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। आने वाले साल में इस संख्या को और बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत जून-जुलाई में 50 नए डॉग्स की खरीद की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इन डॉग्स को विशेष प्रशिक्षण देने के बाद अगले साल तक डॉग दस्ते में शामिल कर लिया जाएगा। बिहार पुलिस का डॉग स्क्वॉड सीआईडी के अधीन कार्य करता है और राज्य में सुरक्षा, जांच तथा वीआईपी प्रोटोकॉल जैसे संवेदनशील कार्यों में इनकी भूमिका बेहद अहम होती है।
हाल में शामिल किए गए प्रशिक्षित डॉग्स को अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किया गया है। दरभंगा और पूर्णिया के हवाईअड्डों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दो-दो कुत्तों की तैनाती की गई है। इसके अलावा पटना मेट्रो स्टेशनों पर भी दो-दो डॉग्स सुरक्षा व्यवस्था में लगाए गए हैं। सीमावर्ती जिलों में जहां कैनेल यानी कुत्तों के रहने की विशेष व्यवस्था उपलब्ध है, वहां भी एक-एक स्वान की तैनाती की गई है। वहीं राजधानी पटना में वीआईपी चेकिंग और अति महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की सुरक्षा के लिए आठ कुत्तों को अलग से रखा गया है। इन कुत्तों को अलग-अलग तरह के विशेष कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत तैनात किया जा सके।
2027 तक 150 स्वानों का लक्ष्य
पुलिस मुख्यालय ने वर्ष 2027 तक डॉग स्क्वॉड की क्षमता बढ़ाकर लगभग 150 करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए नए डॉग्स की खरीद और प्रशिक्षण की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। इस वर्ष खरीदे जाने वाले 50 कुत्तों को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के पास मोइनाबाद स्थित इंटीग्रेटेड इंटेलिजेंस ट्रेनिंग एकेडमी आईआईटीए में ट्रेनिंग दिया जाएगा। यह ट्रेनिंग करीब एक साल का होगा, जिसमें कुत्तों को विस्फोटक पदार्थों की पहचान, अपराध स्थल की जांच, ट्रैकिंग और वीआईपी सुरक्षा से जुड़ी विशेष तकनीकों का अभ्यास कराया जाएगा। ट्रेनिंग पूरा होने के बाद इन कुत्तों को बिहार पुलिस के दस्ते में शामिल किया जाएगा। संभावना है कि अगले वर्ष जुलाई-अगस्त तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
इन नस्लों के कुत्तों होते हैं शामिल
बिहार पुलिस के स्वान दस्ते में मुख्य रूप से जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर और एलसीसी नस्ल के कुत्तों को शामिल किया जाता है। इन नस्लों को सूंघने की क्षमता, तेज प्रतिक्रिया और अनुशासित व्यवहार के कारण सुरक्षा और जांच कार्यों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
कुत्तों की बढ़ती संख्या से मिलेगा बड़ा लाभ
डॉग स्क्वॉड की संख्या बढ़ने से पुलिस को अपराध अनुसंधान में काफी मदद मिलेगी। किसी भी अपराध स्थल पर सुराग जुटाने, विस्फोटक पदार्थों की पहचान करने और संदिग्ध वस्तुओं की जांच में प्रशिक्षित कुत्तों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन, वीआईपी कार्यक्रम और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा जांच को और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि डॉग स्क्वॉड के विस्तार से सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और अपराध अनुसंधान की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। राज्य में डॉग स्क्वॉड के विस्तार को लेकर जारी इस पहल से आने वाले समय में बिहार पुलिस की जांच और सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बोले सीआईडी के एडीजी पारसनाथ
हाल ही में विशेष रूप से प्रशिक्षित 30 नए कुत्तों को डॉग स्क्वॉयड में शामिल किया गया है। विभाग की योजना है कि अगले वर्ष तक कुत्तों की कुल संख्या बढ़ाकर 150 तक कर दी जाए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। डॉग स्क्वॉयड में शामिल किए जाने से पहले सभी कुत्तों को मोइनाबाद स्थित विशेष प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षित किया जाता है, जहां उन्हें विभिन्न परिस्थितियों में कार्य करने के लिए तैयार किया जाता है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही उन्हें दस्ते में शामिल किया जाता है। इसके साथ ही बेहतर नस्ल के कुत्तों की खरीद के लिए भी प्रक्रिया जारी है, ताकि स्वान दस्ते की क्षमता और कार्यकुशलता को और मजबूत बनाया जा सके।
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