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एनकाउंटर मोड में बिहार पुलिस, चार माह में 12 झड़प, 4 अपराधी ढेर

बिहार पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए कड़ी कार्रवाई कर रही है। पुलिस जगह-जगह रेड डाल रही है।

Bihar Police

बिहार पुलिस। AI इमेज। प्रतीकात्मक तस्वीर। Photo Credit: Sora

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संजय सिंह, पटना: बिहार में अपराध के खिलाफ पुलिस का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। गोली का जवाब गोली की नीति के तहत राज्य में पिछले चार महीनों के दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच 12 एनकाउंटर हो चुका है। 

अलग-अलग एनकाउंटर की घटनाओं में अब तक चार कुख्यात अपराधी मारे गए हैं, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। भागलपुर और सिवान में हुई लगातार दो मुठभेड़ों ने यह साफ कर दिया है कि पुलिस अब अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शने के मूड में नहीं है।

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अपराधियों में खौफ का माहौल

सुल्तानगंज के कार्यपालक पदाधिकारी की हत्या के मुख्य आरोपी रामधनी यादव को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। यह कार्रवाई सुल्तानगंज बाइपास रोड के समीप छापेमारी के दौरान हुई, जहां अपराधी ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में वह ढेर हो गया। इस घटना के ठीक अगले दिन सिवान में पूर्व विधान परिषद के भतीजे की हत्या के मुख्य आरोपी छोटू कुमार यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल हो गया। लगातार दो दिनों में हुई इन घटनाओं ने अपराधियों के बीच खौफ का माहौल बना दिया है।

एनकाउंट मोड में काम कर रही बिहार पुलिस

इस वर्ष की शुरुआत से ही पुलिस का अभियान तेज रहा है। 6 फरवरी को वैशाली जिले में सोना लूट कांड के सरगना और दो लाख रुपये के इनामी अपराधी प्रिंस उर्फ अभिजीत को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था। उसके पास से अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद हुआ था, जिसमें नाइन MM पिस्टल, चाइनीज पिस्टल और बड़ी मात्रा में कारतूस शामिल थे। प्रिंस पर हत्या, लूट, रंगदारी और आर्म्स एक्ट के करीब 30 मामले दर्ज थे।

 

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एनकाउंट पर एनकाउंट कर रही पुलिस

17 मार्च को मोतिहारी में पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए कुंदन ठाकुर और प्रियांशु कुमार को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। दोनों अपराधी कई संगीन मामलों में वांछित थे। मौके से पुलिस ने एक कार्बाइन, दो पिस्टल, कट्टे और भारी मात्रा में गोलियां बरामद कीं। इन घटनाओं ने यह संकेत दिया कि पुलिस अब संगठित अपराध के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।

पुलिस ने 4 कुख्यात अपराधियों को ढेर किया

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन मुठभेड़ों में चार अपराधियों की मौत के अलावा कई अन्य बदमाश घायल हुए हैं। इनमें मैनेजर राय, प्रहलाद यादव, नीतीश कुमार, परमानंद यादव, राजीव कुमार, धीरज कुमार, मंगल कुमार और छोटू कुमार यादव जैसे नाम शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि ये सभी अपराधी गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त रहे हैं और लंबे समय से फरार चल रहे थे।

 

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कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता 

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपराधियों के खिलाफ लगातार चल रही कार्रवाई इसी दिशा में एक अहम कदम है। अधिकारियों के अनुसार, पुलिस पहले अपराधियों को आत्मसमर्पण का मौका देती है, लेकिन जब वे फायरिंग करते हैं, तो जवाबी कार्रवाई अपरिहार्य हो जाती है।

एनकाउंटर पर उठे सवाल

लगातार बढ़ती मुठभेड़ों ने कानून-व्यवस्था को लेकर एक नई बहस भी छेड़ दी है। एक ओर जहां आम जनता इसे सुरक्षा की दृष्टि से सकारात्मक मान रही है, वहीं कुछ लोग इसे लेकर सवाल भी उठा रहे हैं। इसके बावजूद पुलिस का स्पष्ट संदेश है  कि अपराध करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है।

राज्य में अपराध के खिलाफ जारी इस सख्त अभियान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में भी पुलिस का एक्शन इसी तरह जारी रहेगा। अपराधियों के लिए यह एक कड़ा चेतावनी संकेत है कि कानून से बच निकलना अब आसान नहीं होगा।

 


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