संजय सिंह, पटना: बिहार राज्य में अब मंत्रियों, जजों और वरिष्ठ अधिकारियों की यात्रा पहले से कहीं अधिक आरामदायक और लग्जरी होने जा रही है। सरकार ने सरकारी वाहनों की खरीद के लिए तय कीमत की सीमा बढ़ा दी है। इस फैसले के बाद अब उच्च पदों पर बैठे अधिकारी ज्यादा महंगी और आधुनिक सुविधाओं वाली गाड़ियों में सफर कर सकेंगे।
दरअसल, ऑटोमोबाइल बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है। वित्त विभाग की व्यय सचिव रचना पाटिल द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अलग-अलग श्रेणी के अधिकारियों के लिए वाहन खरीद की सीमा में बदलाव किया गया है। यह निर्णय प्रशासी पदवर्ग समिति की बैठक के बाद लिया गया, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव ने की।
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कितनी बढ़ी सीमा
नई व्यवस्था के तहत मंत्रियों और उनके समकक्ष पदाधिकारियों के लिए वाहन खरीद की अधिकतम सीमा 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 37 लाख रुपये कर दी गई है। इसी तरह अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों के लिए यह सीमा 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गई है। जिलाधिकारी और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जैसे अधिकारियों के लिए अब 22 लाख रुपये तक के वाहन खरीदे जा सकेंगे, जबकि पहले यह सीमा 20 लाख रुपये थी। पुलिस अधीक्षक के लिए यह सीमा 16 लाख रुपये से बढ़ाकर 18 लाख रुपये कर दी गई है। वहीं अन्य अधिकारियों के लिए यह सीमा 14 लाख रुपये से बढ़ाकर 16 लाख रुपये कर दी गई है।
बदलेगा सरकारी काफिले का अंदाज
इस फैसले का असर अब सरकारी काफिलों की झलक में भी दिखाई देगा। अब तक मंत्री और बड़े अधिकारी मुख्य रूप से टोयोटा इनोवा क्रिस्टा या टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियों का इस्तेमाल करते थे लेकिन अब वे इससे भी ज्यादा आधुनिक और प्रीमियम मॉडल चुन सकेंगे।
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अब अधिकारी टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस, महिंद्रा एक्सयूवी 700 और टाटा सफारी जैसी नई और सुविधाजनक गाड़ियों में नजर आ सकते हैं। वहीं जिला स्तर के अधिकारी और न्यायाधीश भी अब बेहतर मॉडल की गाड़ियां इस्तेमाल कर सकेंगे। छोटे स्तर के अधिकारी जो अब तक बोलेरो जैसी गाड़ियों में चलते थे, अब ज्यादा आरामदायक वाहनों का रुख कर सकेंगे।
सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि पुरानी गाड़ियों को बदलने और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला जरूरी था। बेहतर गाड़ियों से अधिकारियों को काम करने में सुविधा होगी। हालांकि, कुछ लोग इस फैसले की आलोचना भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब आम जनता महंगाई से परेशान है, तब सरकारी पैसे से अधिकारियों की लग्जरी बढ़ाना ठीक नहीं है। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बता दें कि इससे पहले साल 2023 में भी मंत्रियों की गाड़ी का बजट बढ़ाया गया था।