संजय सिंह, पटना: साल 2025-26 बिहार के मखाना किसानों के लिए सुनहरी यादें लेकर आया है। कभी सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सिमटा रहने वाला 'मिथिला मखाना' अब विदेश में अपनी धाक जमा रहा है। बिहार के लिए यह गर्व की बात है कि खास पहचान (GI-Tag) वाले इस मखाने को पहली बार समुद्री रास्ते से दुबई (UAE) भेजा गया है। इसे राज्य की एक बहुत बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
पूर्णिया जिले से 21 जनवरी 2026 को 2 टन मखाने की पहली खेप दुबई के लिए रवाना की गई। भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय, बिहार सरकार और निर्यात संस्था 'एपीडा' की मदद से यह मुमकिन हो पाया है। इस सफलता ने दिखा दिया है कि बिहार का मखाना अब दुनिया भर के ऊंचे मानकों और अच्छी पैकिंग के मामले में किसी से पीछे नहीं है।
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मखाना बोर्ड और करोड़ों के बजट से मिली नई ताकत
मखाना खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने सितंबर 2025 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड बनाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद 15 सितंबर 2025 को पूर्णिया में इसकी शुरुआत की थी। इस बोर्ड से करीब 5 लाख किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। इसके साथ ही सरकार ने मखाना विकास योजना के लिए लगभग 476 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इस पैसे का इस्तेमाल अच्छे बीज, नई मशीनें, मखाने की ब्रांडिंग और उसे विदेश भेजने (निर्यात) में किया जा रहा है।
तीन गुना बढ़ी खेती, किसानों की जेब में पहुंचा पैसा
सरकारी मदद और नई तकनीक का असर अब खेतों और तालाबों में दिखने लगा है। पिछले कुछ सालों में मखाना उगाने का इलाका करीब तीन गुना बढ़ गया है। साल 2012 में जहां सिर्फ 13,000 हेक्टेयर में मखाना होता था अब वह बढ़कर 35,000 हेक्टेयर के पार पहुंच गया है। दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार और सहरसा जैसे जिले मखाना उत्पादन के बड़े केंद्र बन चुके हैं। इससे किसानों की कमाई बढ़ी है और गाँवों की आर्थिक हालत में बड़ा सुधार हुआ है।
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मखाना बनेगा ब्रांड बिहार
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव के अनुसार, यह साल बिहार के मखाने के लिए इतिहास रचने वाला रहा है। दुबई तक मखाना पहुंचना इस बात का सबूत है कि हमारे किसानों को अब दुनिया भर के बाजार से जुड़ने का मौका मिल रहा है। सरकार अब मखाने को ब्रांड बिहार के रूप में पूरी दुनिया में मशहूर करने के लिए काम कर रही है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।