संजय सिंह, पटना। बिहार में इन दिनों बच्चा चोरी की अफवाहों से पुलिस विभाग हलकान है। दो दिन के भीतर पांच शिकायतें मिलीं। जांच में सभी अफवाह निकली। इसके बाद बुधवार को पटेल भवन में अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने लोगों से अफवाह पर ध्यान न देने और कानून हाथ में न लेने की अपील की। ए़डीजी ने कहा कि अगर कोई मामला सामने आता है तो तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दें। पुलिस मामले की जांच करेगी।
एडीजी अमित कुमार जैन ने बताया कि पिछले दो दिनों में बच्चा चोरी की पांच शिकायतें मिलीं। इसमें मुजफ्फरपुर जिले की दो और जमुई, पूर्णिया, नालंदा जिले के एक-एक मामले हैं। पुलिस की जांच में सभी मामले अफवाह निकले।
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एडीजी का कहना है कि बच्चा चोरी की अफवाह बहुत तेजी से फैलती है। लोगों की भीड़ भी जुट जाती है। ऐसे में मॉब लिंचिंग जैसी स्थित बन जाती है। इसमें कोई भी निर्दोष शख्स भीड़ का शिकार बन सकता है। उन्होंने लोगों से कानून हाथ में नहीं लेने और किसी भी प्रकार की घटना की जानकारी डायल 112 और पुलिस थाने में देने की अपील की।
2025 में 14699 बच्चे गुमशुदा, 7772 मिले
एडीजी अमित कुमार जैन ने बताया कि पिछले साल गुमशुदगी के 14699 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें 12526 लड़की और 2173 लड़के थे। पुलिस ने 7772 बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया। वहीं 6927 बच्चे अब भी लापता हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चा गुम होने के मामलों में सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अगर सूचना मिलती है तो तुरंत जांच कर कार्रवाई सुनिश्चत करें। अगर कोई बच्चा 24 घंटे तक गुम रहता है तो उस मामले में केस दर्ज करना अनिवार्य है। चार माह तक बच्चा गुमशुदा रहता है तो वह मामला एंटी ह्यूमैन ट्रैफकिंग यूनिट (एएसटीवी) को भेजा जाता है। यह यूनिट सभी जिलों में कार्यरत है।
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बच्चा चोरी की शिकायतों में हुआ इजाफा
एडीजी अमित कुमार जैन ने बताया कि बच्चा गायब होने की शिकायतों में वृद्धि हुई है। बच्चा चोरी के मामलों में कई गिरोह को भी गिरफ्तार किया गया है और कई बच्चों को बरामद भी किया गया है। बिहार पुलिस एसओपी का पालन करती है। भारत सरकार का वात्सल्य पोर्टल है। इससे देशभर के थाने जुड़े हैं। बिहार से गुम हुआ बच्चा अगर किसी दूसरे राज्य में बरामद होता है तो उसकी जानकारी पुलिस को मिल जाती है और पुलिस उसे वहां से वापस लेकर परिजनों को सौंप देती है।