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2024 में सस्पेंड, बहाली हुई तो फिर चुराया सोना, बिहार में दरोगा पर लगा इल्जाम

बिहार के वैशाली जिले में चोर के घर छापा मारने गए दरोगा ने सोना और पैसा बरामद किया लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया। मामले का खुलासा होने के बाद दरोहा और उसके साथी को निलंबित कर दिया गया।

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सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit: SORA

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संजय सिंह, पटना, बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी कानून व्यवस्था और पुलिस की छवि को सुधारने की कोशिश में लगे हुए हैं लेकिन कुछ पुलिसकर्मियों की हरकत की वजह से विभाग और वर्दी की छवि दागदार हो जाती है। कुछ दिन पहले ही गया जी रेल थाना प्रभारी और चार पुलिसकर्मियों को सोना लूट के मामले में गिरफ्तार और निलंबित किया गया था। इस घटना को लेकर विभाग की काफी बदनामी हुई थी। अब नया मामला सामने आया है जिलमें पुलिस वालों ने चोर के घर में छापा मारा और कुछ सामान बरामद किया लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में इस सामान को दर्ज ही नहीं किया। मामले का खुलासा होने के बाद जांच हुई तो आरोपी पुलिकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। 

 

यह पूरा मामला बिहार के वैशाली जिले के लालगंज थाने से जुड़ा है। आरोप है कि थानाध्यक्ष और एक दारोगा चोरी का सामान बरामद करने एक चोर के घर गए थे। मजेदार बात तो यह है कि दारोगा ने वहां से बरामद एक किलो सोना और मोटी रकम सीजर लिस्ट में दर्ज ही नही की। मामले का खुलासा हुआ तो विभागीय जांच हुई। जांच के बाद एसपी की रिपोर्ट पर डीआईजी ने दोनो को निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग में ही हेरफेर का यह मामला अब चर्चा में है।

 

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क्या है पूरा मामला?

वैशाली जिले के लालगंज थाना प्रभारी संतोष कुमार को सूचना मिली थी कि वीरनपुर गांव के निवासी रामप्रीत सहनी के घर चोरी के सामनों का बंटवारा हो रहा है। पुलिस छापेमारी के लिए वहां गई। पुलिस के आने की भनक पाकर पांच छह अपराधी भाग गए। पुलिस ने बड़ी मात्रा में वहां से समान बरामद किया। पुलिस ने आरोपी सहनी की पत्नी को भी गिरफ्तार कर लिया। बरामद सामग्री में टीवी, गोली, बर्तन आदि था। जिसकी चर्चा सीजर लिस्ट में भी की गई। लेकिन नगद राशि और सोने की चर्चा सीजर लिस्ट में नही की गई। 

 

ग्रामीणों का कहना है कि छापेमारी में एक किलो सोना और लाखों की नगद राशि बरामद हुई थी। विभागीय नियमों के अनुसार, छापेमारी का वीडियो ग्राफी कराना अनिवार्य है लेकिन दारोगा ने ना तो छापेमारी का वीडियो बनाया और ना ही इसकी सूचना सीनियर अधिकारी को दी। वैशाली के एसपी ललित मोहन शर्मा को जब घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने एएसपी को मामले का जांच करने का आदेश दे दिया। 

जांच में खुला राज 

सोना चोरी का मामला पूरे इलाके में फैल चुका था। एसपी के निर्देश पर एएसपी ने मामले की जांच शुरू की। वह आरोपित के परिजनों और सीजर लिस्ट के गवाहों से भी मिले। जांच के बाद दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच में दानों को दोषी बताते हुए एएसपी ने अपनी रिपोर्ट एसपी को सौंप दी। एसएसपी की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद एसपी ने डीआईजी को कारवाई के लिए लिखा। डीआईजी ने एसपी की रिपोर्ट पर सहमति जताते हुए दोनो को निलंबित कर दिया। 

 

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विभाग पर उठ रहा सवाल

पुलिस मुख्यालय ने एक निर्णय लिया था कि दागदार पुलिसकर्मियों की पोस्टिंग थाने में नही होगी। जब यह फैसला लिया गया था तब बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय थे। उनके हटते ही जिले के एसपी ने इस मामले में घालमेल करना शुरु कर दिया। दागदार पुलिसकर्मियों की नियुक्ति थाने में धड़ल्ले से की जाने लगी। अगर ऐसा नही होता तो शायद यह घटना नही होती। 

 

सोना चोरी के मामले में शामिल दारोगा सुमन जी झा को 4 सितंबर 2024 को निगरानी विभाग की टीम ने 11 हजार रुपये घुस लेते रंगे हाथ पकड़ा था। लालगंज के थाना प्रभारी संतोष कुमार पर भी पहले से गंभीर आरोप थे। उनपर आरोप था कि एक महिला ने एक डाक्टर के विरुद्ध शारीरिक शोषण का आरोप लगाया था लेकिन थाना प्रभारी रहते हुए दारोगा ने पीड़ित महिला की मदद करने की बजाय डॉक्टर की मदद की थी। जब यह मामला सीनियर अधिकारी के संज्ञान में आया तो इस मामले में दारोगा से स्पष्टीकरण पूछा गया लेकिन दारोगा ने स्पष्टीकरण का कोई जवाब नही दिया। दारोगा की यह हरकत पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है

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