संजय सिंह, पटना। बिहार के सासाराम की एक सामान्य-सी दोपहर अचानक सनसनी में बदल गई, जब निगरानी विभाग की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सटीक और तेज कार्रवाई करते हुए एक सरकारी अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ लिया। रोहतास जिला के राजपुर प्रखंड में तैनात प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी जनार्दन कुमार 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए, वह भी उसी वक्त, जब उन्हें शायद जरा भी अंदाजा नहीं था कि हर कदम पर नजर रखी जा रही है।
पूरा मामला पैक्स गोदाम के सत्यापन से जुड़ा है। आरोप है कि जनार्दन कुमार ने पैक्स प्रबंधक प्रशांत कुमार से गोदाम के निरीक्षण और सत्यापन के नाम पर 10 हजार रुपये की मांग की। शुरुआत में यह प्रक्रिया का हिस्सा बताकर पेश किया गया लेकिन असलियत धीरे-धीरे साफ हो गई। यह सीधी-सीधी घूस की मांग थी।
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दबाव बढ़ता देख प्रशांत कुमार ने चुप रहने के बजाय सिस्टम पर भरोसा किया और निगरानी विभाग का दरवाजा खटखटाया। यहीं से कहानी ने मोड़ लिया। शिकायत को हल्के में नहीं लिया गया। टीम ने पहले गुप्त जांच की, हर पहलू को परखा और जब आरोप सही पाए गए, तब एक सटीक जाल बिछाया गया।
रंगे हाथ पकड़े गए अधिकारी
फिर आया वह पल, जिसने पूरे मामले को उजागर कर दिया। तय योजना के तहत जैसे ही जनार्दन कुमार ने रिश्वत की रकम हाथ में ली, निगरानी टीम ने तुरंत दबिश दी। कुछ ही सेकंड में खेल खत्म हो चुका था। अधिकारी रंगे हाथों पकड़ा जा चुका था। मौके पर मौजूद टीम ने पूरी प्रक्रिया को कानूनी ढंग से पूरा किया, ताकि केस मजबूत बना रहे।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अपने साथ लेकर टीम पटना रवाना हो गई। इसके साथ ही सासाराम स्थित उनके आवास पर भी तलाशी ली गई। हालांकि वहां से कोई बड़ी आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी खत्म नहीं हुई है। जरूरत पड़ी तो और परतें भी खोली जाएंगी।
भ्रष्ट अधिकारियों की बेचैनी बढ़ी
निगरानी विभाग के अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि शिकायत सही थी, इसलिए कार्रवाई भी उतनी ही ठोस हुई। इस पूरे ऑपरेशन ने यह दिखा दिया कि अब शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है।
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इस घटना के बाद प्रशासनिक गलियारों में बेचैनी साफ देखी जा रही है। वहीं आम लोगों के बीच एक उम्मीद भी जगी है कि अगर हिम्मत कर आवाज उठाई जाए, तो व्यवस्था जवाब देती है।