बिहार में बड़े राजनीतिक फेरबदल के बाद अब बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने पुलिस महकमे में कई बड़े बदलाव किए हैं। बिहार सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 16 सनियर आईपीएस अधिकारियों का ट्रांसफर और पोस्टिंग की गई है। बिहार में यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी लिस्ट में एक नाम पर अब विवाद भी खड़ा होता हुआ नजर आ रहा है।
इन 16 सीनियर अधिकारियों में एक नाम आईपीएस अमित कुमार जैन का भी शामिल है। इन्हें बिाहर सरकार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में अपर पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी इस नियुक्ति के बाद उनके प्रशासनिक करियर के एक पुराने विवाद की चर्चा फिर से शुरू हो गई है। आर्थिक अपराध इकाई में अब वह अहम भूमिका निभाएंगे लेकिन इससे पहले वह खुद घोटाले में जांच का सामना कर चुके हैं।
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क्या था सृजन घोटाला?
बिहार में सृजन घोटाले का खुलासा साल 2017 में हुआ था। अगस्त 2017 में भागलपुर जिलाधिकारी आदेश तितरमारे के सिग्नेचर वाला एक चेक बैंक ने यग कहकर वापस कर दिया था कि पर्याप्त पैसे नहीं हैं। यह चेक एक सरकारी खाते का था। इसके बाद इस मामले की जांच शुरू हुई। जांच में बैंक अकाउंट में पैसा ना होने की बात सामने आई। बाद में जांच में इसमें कई बड़े अधिकारियों के नाम सामने आए। इसइस घोटाले का नाम 'सृजन घोटाला' इस कारण पड़ा क्योंकि कई सरकारी विभागों की रकम सीधे डिपार्टमेंट के खाते से 'सृजन महिला विकास सहयोग समिति' नाम के एनजीओ के छह खातों में ट्रांसफर की जाती थी। इशके बाद पैसों की हेराफेरी होती थी।
अमित कुमार जैन का नाम कैसे आया?
इस घोटाले के मामले में भागलपुर जिले के पूर्व डीआईडी अणित कुमार जैन और उनके रिश्तेदार के खाते में सृजन के खाते से 27 लाख रुपये डाले गए थे। यह बड़ा खुलासा सीबीआई की जांच में हुआ था। सीबीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2017 में आईपीएस अमित जैन के खाते में दो बार में 15 लाख रुपए भेजे गए थे।
रिश्तेदार के खाते में भी भेजा पैसा
सीबीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 11 अप्रैल 2017 को अमित कुमार जैन के अकाउंट में 6 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इसी अकाउंट में सृजन एनजीओ ने 12 अप्रैल 2017 को 9 लाख रुपये ट्रांसफर किए। इसके अलावा अमित कुमार जैन के रिश्तेदार राजेश जैन के खाते में भी 24 अप्रैल 2017 को 6 लाख रुपये और 8 मई 2017 को 6 लाख रुपे ट्रांसफर किए दए। इसके अलावा अमित जैन के रिश्तेदार राजेश जैन के अकाउंट में भी दो बार 6-6 लाख रुपए जमा किए गए थे।
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अब खुद देखेंगे भ्रष्टाचार के मामले
सीनियर अधिकारि अमित कुमार जैन ने उस समय तो आरोपों से इनकार कर दिया था लेकिन जांच में उनका नाम सामने आया था। उन्होंने इसे निजी ट्रांजेक्शन बता दिया था। इसके बाद अब उन्हें आर्थिक अपराध इकाई में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। यह वही इकाई है जो आर्थिक अपराध, भ्रष्टाचार, घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच करती है। ऐसे में उनकी इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।