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पढ़ाई 12वीं तक और काम डॉक्टर वाला, कानपुर किडनी रैकेट का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

कानपुर पुलिस ने किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के मुख्य आरोपी रोहित तिवारी को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी सिर्फ 12वीं पास है।

representative image of kanpur Kidney transplant racket accused

प्रतीकात्मक तस्वीर। (Sora AI Generated Image)

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उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने किडनी ट्रांसप्लांट के एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए इसके मुख्य 'मास्टरमाइंड' को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया आरोपी 34 वर्षीय रोहित तिवारी महज 12वीं पास है लेकिन उसका नेटवर्क और रसूख ऐसा था कि वह खुद को डॉक्टर बताकर बड़े-बड़े अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सकों को अपने इशारों पर नचाता था। पुलिस ने इस शातिर जालसाज पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।

 

पुलिस के मुताबिक, हरदोई का रहने वाला रोहित तिवारी साल 2018 से ही इस काले कारोबार की सबसे खास व्यक्ति बना हुआ था। वह केवल को-ऑर्डिनेशन का काम ही नहीं करता था, बल्कि डोनर्स को ढूंढने से लेकर सर्जरी के लिए डॉक्टरों की टीम और अस्पतालों का बंदोबस्त भी वही करता था। पूछताछ में सामने आया है कि वह अब तक 30 से अधिक लोगों की किडनी का अवैध सौदा कर चुका है, जिसमें करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है।

 

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ऐसे चलता था रैकेट

जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपना शिकार बनाता था। डोनर को महज 5 से 6 लाख रुपये का लालच देकर उसकी किडनी निकलवा ली जाती थी। इसके बाद उसी किडनी को जरूरतमंद मरीजों को 60 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक की भारी-भरकम कीमत पर बेच दिया जाता था। इस पूरे खेल में बिचौलियों से लेकर अस्पताल प्रबंधन तक का मोटा कमीशन बंधा हुआ था।

 

DSP एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि रोहित तिवारी मेरठ से डॉक्टरों और टेक्नीशियनों की एक 'स्पेशल टीम' किराए पर लाता था। इस टीम में डॉ. अली, वैभव और अफजल जैसे लोग शामिल थे, जो कानपुर के विभिन्न निजी अस्पतालों में जाकर अवैध सर्जरी को अंजाम देते थे। रोहित ही यह तय करता था कि किस मरीज का ट्रांसप्लांट किस अस्पताल में होगा। पुलिस अब इस टीम के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में मेरठ और गाजियाबाद में छापेमारी कर रही है।

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नामी डॉक्टर जा चुके हैं जेल

इस रैकेट की जड़ें कितनी गहरी हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस अब तक 5 नामी डॉक्टरों समेत कई लोगों को जेल भेज चुकी है। इनमें कानपुर के डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा भी शामिल हैं, जिनके अस्पताल का इस्तेमाल इन अवैध ऑपरेशनों के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने अब लखनऊ, मेरठ, गाजियाबाद और कानपुर के करीब 12 अस्पतालों को चिन्हित किया है, जिनकी भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है।


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