गुजरात के जूनागढ़ जिले से एक परेशान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहा विसावदर तालुका के भुतड़ी गांव में दलित समुदाय के लोगों ने भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अलग बैठकर खाना खाने के लिए कहा गया। इस मामले के सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया और उन्होंने 25 साल के अजय चतुर बोरिचा की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है। अजय ने अपनी शिकायत में पांच लोगों का नाम लिया है और छुआछूत करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने सभी पांच आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।
अजय ने अपने साथ हुए भेदभाव के बारे में बताते हुए कहा,'हमें अपने प्लेट और गिलास खुद लाने के लिए कहा गया और हमें अलग बैठकर खाना खाने को कहा गया। हमारे लिए अलग से खाना बनाया गया था और बाकी लोगों के खाने के बाद हमें खाना दिया जाना था और हमें मंदिर में जाने से भी रोका गया।'
यह भी पढ़ें: गाय के बछड़े के चमड़े से ही अपने बैग क्यों बनाते हैं LV और Gucci जैसे ब्रांड?
कैसे शुरू हुआ विवाद?
जानकारी के मुताबिक, 29 अप्रैल की शाम को गांव में राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में पूरे गांव को निमंत्रण दिया गया जिसमें सभी जातियों के लोग शामिल थे। हालांकि, मैनेजमेंट कमेटी में कथित तौर पर सिर्फ कुछ ही जातियों के लोग शामिल थे। मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के आयोजकों ने भुतड़ी गांव के दलित समुदाय को निमंत्रण दिया था। इसी निमंत्रण के बाद से यह विवाद शुरू हुआ। आयोजकों ने कुछ ऐसी शर्तें रख दी थीं जो जाहिर तौर पर उनकी जातिवादी मानसिकता को उजागर कर रही थीं।
निमंत्रण पर जातिवादी शर्तें
एफआईआर के अनुसार, अजय बोरिचा ने अपनी शिकायत में बताया कि 27 अप्रैल को शाम करीब 5 बजे गांव में अनुसूचित जाति समुदाय के कई लोग मौजूद थे। उसी समय पांच आयोजक उनकी बस्ती में पहुंचे, जहां करीब 10 लोग बैठे हुए थे। एफआईआर में कहा गया है, 'पांचों आयोजक 27 अप्रैल को शाम करीब 5 बजे हमारी गली में आए और हमारी समुदाय के करीब 10 लोग वहां बैठे थे। आयोजकों ने हमें बताया कि 29 अप्रैल की शाम को मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के तहत भोजन रखा गया है।'
अजय बोरिचा का आरोप है कि आयोजकों ने उनसे कहा कि हम आपको मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के भोजन के लिए निमंत्रण दे रहे हैं लेकिन आपको तब आना होगा जब अन्य जाति के लोग खाना खा चुके हों। कथित तौर पर आयोजकों ने उनसे कहा, 'आप सभी को अपने प्लेट और कटोरे खुद लाने होंगे। आपके लिए खाना और पानी अलग से रखा गया है।'
दलित समुदाय में गुस्सा
आयोजकों की इन शर्तों वाले निमंत्रण के बाद दलित समुदाय के लोगों में गुस्सा है। दलित समुदाय के कई लोग 28 अप्रैल को विसावदर पुलिस स्टेशन पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत को बाद में एफआईआर में बदल दिया गया। मामले की जांच जूनागढ़ पुलिस के एससी/एसटी सेल के डीवाईएसपी रविराजसिंह परमार को सौंपी गई है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इन आरोपियों में बाबू उका हापानी, नरेंद्र भानजी सिरोया, रामनिक समजी सोरठिया, अतुल भीखा सिरोया और फुला पोपट सिरोया शामिल हैं। इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(2) (धर्म, जाति, भाषा आदि के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी फैलाना) और धारा 54 (मौजूद रहकर सहयोग करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत भी केस दर्ज किया गया है, जो एससी/एसटी समुदाय के लोगों का जानबूझकर अपमान या उन्हें नीचा दिखाने से जुड़े हैं।
यह भी पढ़ें: तमिलनाडु में 3 चौंकाने वाले एग्जिट पोल, 2 में NDA और एक में बन रही विजय की सरकार
विवाद के कारण भोज रद्द
डीवाईएसपी रविराजसिंह परमार ने कह कि हमने शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। पहली नजर में मामला दोनों पक्षों के दावों पर आधारित है। सभी आरोपियों को BNSS 35(3) के तहत नोटिस भेजा गया है और उन्हें बयान के लिए बुलाया गया है। हम यह भी जांच कर रहे हैं कि इस मामले में कोई डिजिटल सबूत है या नहीं। इस विवाद के बीच मंदिर में 29 अप्रैल की शाम को प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित किया गया लेकिन विवाद के चलते गांव का सामूहिक भोज रद्द कर दिया गया।