अरविंद केजरीवाल सरकार की गरीब छात्रों को मुफ्त कोचिंग देने वाली योजना पर 38 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा है। इस मामले में एंटी-करप्शन ब्रांच ने दिल्ली में कोचिंग इंस्टिट्यूट से जुड़े 9 डायरेक्टरों को गिरफ्तार किया है। इन इंस्टिट्यूट को 2018-19 में जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना में शामिल किया गया था।
'जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना' के नाम पर केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में मेधावी छात्र छात्राओं को मुफ्त कोचिंग सुविधाएं देने की शुरुआत की थी, लेकिन इस योजना में करोड़ो रुपये का घोटाल के आरोप के बाद यह योजना बंद कर दी गई थी।
इसी मामले में दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने दिल्ली में कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाने वाले 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार सभी आरोपियों को राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।
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22,000 छात्रों ने कोचिंग में एडमिशन लिया
जांच में सामने आया है कि इंस्टीट्यूट के लिए कोचिंग फीस और छात्रों के लिए स्टाइपेंड SC और ST विभाग द्वारा इंस्टिट्यूट को दिया जाना था। 2019-20 में इस योजना को कुछ बदलावों के साथ फिर से शुरू किया गया, यानी ST, OBC, EWS कैटेगरी भी जोड़ी गईं और इस बार 38 और इंस्टिट्यूट को शामिल किया गया। इन दोनों फेज में कुल मिलाकर लगभग 22,000 छात्रों ने इन कोचिंग में एडमिशन लिया।
एसीबी की जांच में क्या सामने आया?
एसीबी की जांच में यह भी पता चला है कि इन इंस्टिट्यूट ने इस योजना के तहत 37.20 करोड़ रुपये सरकार से लिए थे। सभी इंस्टिट्यूट के लिए इस योजना के लिए एक अलग बैंक अकाउंट रखना जरूरी था, लेकिन इसका बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया। जांच में यह भी पता चला कि सरकारी खजाने से फंड लेने के लिए इंस्टिट्यूट ने जो छात्रों की लिस्ट जमा की थी, उसमें दो या उससे ज्यादा इंस्टिट्यूट के कई छात्रों के नाम थे। इसके बाद, बड़ी संख्या में छात्रों को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया।
फंड लेने के लिए दिखाए नकली दस्तावेज
छात्रों ने बताया कि उन्होंने किसी दूसरे इंस्टिट्यूट में दाखिला नहीं लिया था, जिसका मतलब है कि इस योजना में छात्रों के एडमिशन से जुड़े नकली दस्तावेज इंस्टिट्यूट ने सरकारी खजाने से फंड लेने के लिए बनाए और दिखाए। उस दौरान सरकारी अधिकारियों ने भी गलत हाथों में फंड जाने की जांच नहीं की। इसमें यह भी सामने आया है कि कई मामलों में इंस्टिट्यूट को मिली स्टाइपेंड की रकम छात्रों को नहीं दी गई थी।
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एसीबी की जांच जारी
एसीबी की जांच में सामने आया है कि इनमें से कुछ इंस्टिट्यूट ने अपने छात्रों को कोचिंग के लिए लोकल ट्यूशन सेंटर भेजा था। यह भी एक बड़ी गड़बड़ी थी। लोकल ट्यूशन सेंटर के मालिकों और डायरेक्टर्स को अपनी बात समझाने के कई मौके दिए गए, लेकिन वे कोई ठोस सबूत नहीं दे सके। यहां तक कि कुछ इंस्टिट्यूट ने केस दर्ज होने के बाद छात्रों के अकाउंट में स्टाइपेंड ट्रांसफर कर दिया।
एसीबी ने जानकारी देते हुए बताया है कि इस केस में 29 अप्रैल को 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। 30 अप्रैल को उन सभी को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया और 14 दिन की हिरासत में भेज दिया गया। SC-ST विभाग को इंस्टिट्यूट द्वारा दिए गए इनकम सर्टिफिकेट और कास्ट सर्टिफिकेट को भी रेवेन्यू अथॉरिटी से वेरिफाई किया जा रहा है। दूसरे इंस्टिट्यूट और SC/ST विभाग के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की अभी भी जांच चल रही है।