दिल्ली के विवेक विहार में हुए अग्निकांड पर देश गमगीन है। देखते ही देखते 9 लोगों राख हो गए और दमकल विभाग किसी की जान नहीं बचा सका। घंटों के रेस्क्यू के बाद जो लाशें बरामद हुईं, उन्हें न तो घर वाले पहचान सके, न ही वहां मौजूद बचावकर्मी। रेस्क्यू करने वाले लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि कौन महिला है, कौन पुरुष है, इसकी भी पहचान नहीं हो रही है।
विवेक विहार में शनिवार सुबह एक आवासीय इमारत में भीषण आग लग गई थी। इस आग में 9 लोगों ने जान गंवाई। मरने वालों में एक परिवार के 5 सदस्य, दूसरे परिवार के 3 सदस्य और एक महिला शामिल हैं। आग लगने का कारण एसी में शॉर्ट सर्किट बताया गया।
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हादसा कैसे हुआ है?
दूसरी मंजिल पर एसी में शॉर्ट सर्किट से आग शुरू हुई और तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गई। इमारत की संरचना और डिजाइन की वजह से लोग बाहर नहीं निकल पाए। तीसरी मंजिल पर रहने वाले अरविंद जैन (60), उनकी पत्नी अनीता जैन (58), बेटा निशांक जैन (35), बहू अंचल जैन (33) और 1 साल के पोते की मौत हो गई।
'दरवाजा जाम हो गया है...', चीखते रहे मौत मिली
निशांक जैन का परिवार मनेसर घूमने जाने वाला था, लेकिन पोते के बीमार होने की वजह से अचानक यह ट्रिप घरवालों ने टाल दी। सोनाली जैन ने बताया कि उनके सास-ससुर, देवर, भाभी और भतीजे ने आखिरी वक्त में फोन पर बताया कि दरवाजा जाम हो गया है। मदद के लिए बार-बार फोन करते रहे, लेकिन कुछ नहीं हो सका। आग बुझने के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड ने घर के अंदर से शव बरामद किए।
कोई बाथरूम में मिला, किसी की बालकनी में लाश मिली
जैन परिवारों में से एक लाश बाथरूम में मिली, एक बालकनी और कुछ दरवाजे के पास। निशांक जैन चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और दिल्ली और दुबई में ऑफिस चलाते थे। अंचल जैन पंजाब एंड सिंध बैंक में ब्रांच मैनेजर थीं।
छत पर भाग रहे थे, वहीं जल गए
चौथी मंजिल पर रहने वाले नितिन जैन (50), उनकी पत्नी शैली जैन (48) और बेटे सम्यक जैन (25) की मौत हो गई। वे छत की तरफ भाग रहे थे, लेकिन छत का दरवाजा नहीं खुल सका। तीनों शव एक साथ छत के दरवाजे के पास पाए गए।
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हादसे में जान गंवाने वाले लोग कौन थे?
नितिन जैन पेपर व्यापार करते थे और परिवार के साथ रेस्तरां भी चलाते थे। दूसरी मंजिल पर जहां आग लगी, वहां रहने वाली शिखा जैन (45) की मौत हो गई। उनके पति नवीन जैन गंभीर रूप से जल गए हैं। उनकी दो बेटियां प्रियल (17) और रक्षिता (22) जल तो गईं हैं लेकिन जिंदगी बच गई है।
'अगर बेटी कूद जाती तो जान बच जाती'
नवीन जैन ने अस्पताल में बताया कि उन्होंने बेटियों को नीचे कूदने को कहा था, लेकिन खुद सीढ़ियों से उतरने की कोशिश की। शिखा वापस घर के अंदर चली गईं। कुछ लोगों ने दिल्ली में हुए हादसे के बाद फायर बिग्रेड के समय से न पहुंचने को लेकर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों ने भी मदद की। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। पुलिस और MCD अब आग की वजह और इमारत में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की जांच कर रही है।