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योगी के समर्थन में पद छोड़ने वाले डिप्टी कमिश्नर ने वापस लिया इस्तीफा, बताई वजह

यूपी में इस्तीफा देने के बाद से विवादों में आए डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। उन्होंने अपने दिव्यांग सर्टिफिकेट और भाई विश्वजीत के बारे में भी बताया।

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प्रशांत सिंह । Photo Credit: Social Media

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राज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्न प्रशांत कुमार सिंह ने अपने इस्तीफे को वापस लेने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला बिना किसी दबाव के लिया गया है और वे फिलहाल वह अपने कार्यालय में सक्रिय रूप से ड्यूटी निभा रहे हैं। इस बीच, सिंह ने अपने भाई विश्वजीत सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें मुख्तार अंसारी की मऊ गैंग का सक्रिय सदस्य और आर्थिक सलाहकार बताया है। विश्वजीत पर आपराधिक मुकदमों, जबरन वसूली और परिवार के सदस्यों पर हमले के आरोप हैं। इसके अलावा, फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के मामले में सिंह ने अपनी सफाई पेश की है, जिसमें उन्होंने सीएमओ मऊ की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

 

प्रशांत कुमार सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैंने अपने इस्तीफे को वापस ले लिया है। मुझ पर कोई दबाव नहीं है। बिना किसी दबाव के मैंने अपना इस्तीफा वापस लिया है। आज मैं अपने कार्यालय में हूं और अपना कार्य कर रहा हूं।' उन्होंने अपने भाई विश्वजीत सिंह के बारे में विस्तार से बताया कि वह मुख्तार अंसारी की मऊ गैंग का सक्रिय सदस्य है और उसके आर्थिक सलाहकार की भूमिका निभा चुका है। सिंह ने कहा, 'उनके ऊपर तमाम आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। उस व्यक्ति ने अपने माता-पिता को मारा पीटा जिसके संबंध में FIR दर्ज है। उन्होंने JIO ब्रांच मैनेजर को भी जान से मारने की धमकी दी। ये व्यक्ति जबरन वसूली करता है। उनका काम है कि पैसों के लिए दबाव बनाना, वे एक आपराधिक व्यक्ति हैं।'

 

यह भी पढ़ेंः 'फर्जी सर्टिफिकेट से नौकरी ली', इस्तीफा देने वाले प्रशांत के भाई ने खोली पोल

दिव्यांग सर्टिफिकेट के बारे में बताया

यह मामला तब और दिलचस्प हो जाता है जब सिंह ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में उनके भाई विश्वजीत सिंह ने सीएमओ मऊ को एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें दावा किया गया कि प्रशांत कुमार सिंह का दिव्यांग प्रमाणपत्र फर्जी है क्योंकि उस पर तारीख अंकित नहीं है और डॉक्टरों के हस्ताक्षर नहीं हैं। सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'उन्होंने साल 2021 में CMO मऊ को एक प्रार्थना पत्र दिया कि प्रशांत कुमार सिंह ने जो (दिव्यांग) प्रमाणपत्र दिया है वह फर्जी है क्योंकि उस पर तारीख अंकित नहीं है और उस पर डॉक्टरों के हस्ताक्षर नहीं है। CMO मऊ ने इस पर बिना तथ्यों की जांच किए मुझे आकर दोबारा जांच करवाने के लिए कहा। जबकि उनके ही कार्यालय से मुझे प्रमाणपत्र जारी किया गया था।'

 

मऊ CMO ने दिया था जवाब

सिंह ने आगे सीएमओ मऊ की जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें पहले प्रमाणपत्र की वैधता की जांच करनी चाहिए थी। उन्होंने बताया, 'CMO को चाहिए था कि वे जांच लेते कि प्रमाणपत्र उनके कार्यालय से जारी किया गया है या नहीं।’ उन्होंने कहा कि, ‘इसके बाद मैं मुख्य चिकित्सा अधिकारी अयोध्या के सामने प्रस्तुत हुआ और मुख्य चिकित्सा अधिकारी अयोध्या ने CMO मऊ से पूछा कि ये प्रमाणपत्र सही है या नहीं। जिसके जवाब में CMO मऊ ने लिखकर दिया कि यह प्रमाणपत्र सही है। मैं पूछना चाहता हूं कि फिर बार-बार मेरे प्रमाणपत्र को फर्जी क्यों बताया जा रहा है?'

 

सिंह ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि उनका प्रमाणपत्र पूरी तरह वैध है और बार-बार इसे फर्जी बताना अनुचित है। सीएमओ मऊ की ओर से लिखित पुष्टि के बावजूद इस मुद्दे को उठाए जाने से सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसमें कोई साजिश है।

 

यह भी पढ़ें: 'CM योगी का अपमान बर्दाशत नहीं...', अब GST अधिकारी प्रशांत सिंह ने दिया इस्तीफा

दिया था इस्तीफा

प्रशांत सिंह ने इसी हफ्ते अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद के साथ योगी आदित्यनाथ के हुए विवाद के कारण इस्तीफा दे दिया था। इस बात को लेकर काफी बवाल भी हुआ था और तरह तरह के कयास लगाए जाने लगे थे। बाद में उनके भाई विश्वजीत सिंह ने आरोप लगाया था कि उनका दिव्यांग सर्टिफिकेट नकली है। हालांकि, अब उन्होंने इसका खंडन किया है।

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