केरल के एर्नाकुलम सरकारी अस्पताल में 22 साल की एक युवती की हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी फेल हो गई है। मृत महिला का नाम दुर्गा कामी है और वह इलाज कराने, नेपाल से भारत आई थी। हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी चल ही रही थी, तभी दौरा पड़ा और डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके। एर्नाकुलर अस्पताल में पहली बार हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी की जा रही थी। इस सर्जरी में 8 डॅाक्टरों की टीम शामिल थी। दुर्गा कामी को 8 महीने के कोशिशों के बाद हार्ट डोनर मिला था। दिसंबर में हार्ट डोनर मिलने के तुरंत बाद डॅाक्टर ने सर्जरी की। सर्जरी के दौरान ही दिल का दौरा पड़ा और डॅाक्टर दुर्गा कामी के जान बचाने में फेल हो गए।
नेपाल की रहने वाली 22 साल की दुर्गा कामी हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। इस बीमारी में हार्ट की मांसपेशियां असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं, जिससे रक्त को सही ढंग से पंप करना मुश्किल हो जाता है। इसी बीमारी के कारण दुर्गा के माता-पिता की भी पहले ही मौत हो चुकी थी। दुर्गा कामी इस साल इलाज के लिए केरल आई थीं, क्योंकि नेपाल के डॉक्टरों ने उन्हें हार्ट ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी। दुर्गा कामी केरल के एर्नाकुलम जनरल अस्पताल में इलाज करा रही थीं। यह राज्य में पहली बार था जब किसी जिला-स्तरीय सरकारी अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी की गई।
महीनों बाद मिला था डोनर
21 साल का दुर्गा कामी को 46 साल के ए सिबु नाम के एक शख्स का हृदय दान किया गया था। ए सिबु का 14 दिसंबर को सड़क दुर्घटना में एक्सीडेंट हो गया था। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया, जिसके बाद उनके परिवार ने हार्ट डोनेशन की इजाजत दी। एर्नाकुलम अस्पताल की टीम ने हृदय प्राप्त किया और 21 दिसंबर को सफलतापूर्वक हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। ऑपरेशन के बाद दुर्गा की हालत में काफी सुधार देखा गया था। जिसके पोस्ट-ऑपरेटिव इलाज भी जारी था। हालांकि, गुरुवार रात उन्हें अचानक सांस लेने में तकलीफ होने लगी। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन रात 10 बजकर 5 मिनट पर दुर्गा कामी की मौत हो गई।
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स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट कर कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद दुर्गा को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने इसे बेहद दुखद घटना बताया। मंत्री ने एर्नाकुलम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. शाहिरशा से फोन पर बातचीत की और बताया कि डायलिसिस के बाद दुर्गा की हालत में सुधार हुआ था। फिजियोथेरेपी भी शुरू कर दी गई थी, जिससे काफी उम्मीदें जगी थीं। मंत्री ने कहा कि एर्नाकुलम जनरल अस्पताल की टीम ने दुर्गा की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। अंत में उन्होंने दुर्गा के भाई और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
निशुल्क हुआ था इलाज
इस सर्जरी पर केरल सरकार ने करीब 12 लाख रुपये खर्च किए थे। अस्पताल के आठ डॉक्टरों की टीम ने मिलकर यह सर्जरी की थी और डॉक्टरों ने इसके लिए कोई फीस नहीं ली। दुर्गा कामी इस साल जुलाई में केरल इलाज के लिए आई थीं। उस समय उनके भाई तिलक कामी ने मीडिया के सामने केरल सरकार की सराहना की थी। तिलक ने कहा था, “हम कई जगह इलाज के लिए गए, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। सिर्फ केरल सरकार ने हमारा साथ दिया। हम डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ के बहुत आभारी हैं, जिन्होंने हर कदम पर हमारा सहयोग किया।”
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हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ हार्ट ट्रांसप्लांट
दुर्गा कामी पिछले आठ महीनों से केरल स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन में पंजीकृत थीं, लेकिन भारतीय नागरिक न होने के कारण उन्हें प्राथमिक सूची में शामिल नहीं किया गया था। इसके बाद दुर्गा ने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दुर्गा कामी का नाम प्राथमिक सूची में शामिल करने का आदेश दिया, जिसके बाद हार्ट ट्रांसप्लांट संभव हो सका।