गुजरात चुनाव आयोग ने राज्य की वोटर लिस्ट में कई बड़े बदलाव किए हैं। स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) का असर राज्य में देखने को मिल रहा है। चुनाव आयोग की ओर से इस बार वोटर लिस्ट में फेरबदल किया गया है। पूरी जांच के बाद राज्य चुनाव आयोग करीब 77 लाख लोगों के नाम लिस्ट से हटा दिए हैं। इसकी वजह से राज्य के कुल वोटरों की संख्या में 13.4% की कमी आई है। इस लिस्ट में साढ़े नौ लाख नए युवा वोटरों को भी जोड़ा गया है।
प्रशासन ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि लिस्ट में कोई गड़बड़ी न रहे। हटाए गए नामों में वे लोग शामिल थे जिनकी या तो मृत्यु हो गई हैं या अपना घर छोड़कर कहीं और शिफ्ट हो गए हैं। कई मामले तो ऐसे भी मिले जहां एक ही व्यक्ति के पास दो-दो वोटर कार्ड थे।
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क्यों कटे इतने सारे नाम?
जांच में यह बात सामने आई कि करीब 40 लाख ऐसे वोटर है जो स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं। इसके अलावा 18 लाख वोटर मृत पाए गए। करीब 9.8 लाख लोग ऐसे थे जो अपने पते पर मिले ही नहीं। साथ ही 3.8 लाख लोगों के पास डुप्लीकेट कार्ड थे। बाकी के नामों को वेरिफिकेशन करने के बाद अन्य कारणों से हटाए गए हैं।
कहां बढ़े और कहां घटे वोटर?
जिलों की बात करें तो अहमदाबाद अभी भी राज्य में सबसे आगे है। यहां सबसे ज्यादा 49.1 लाख वोटर हैं। अहमदाबाद में ही सबसे ज्यादा 1.5 लाख नए नाम भी जोड़े गए हैं।
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वहीं छोटे जिलों में डांग ने बाजी मारी है, जहां वोटरों की संख्या में सबसे अधिक 2.15% की बढ़त देखी गई। सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे बड़े शहरों में भी भारी संख्या में नए युवाओं ने अपना नाम लिखवाया है, जो यह दिखाता है कि शहरों की तरफ पलायन और युवाओं में वोट देने का उत्साह बढ़ रहा है।