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लुधियाना में 3 दिनों की घोषित बस हड़ताल खत्म, किस बात से नाराज थे संविदाकर्मी?

लुधियाना में ट्रांसपोर्ट विभाग में काम कर रहे संविदा कर्मियों की मांग है कि उन्हें नियमित किया जाए, सही वेतन मिले। क्या है उनकी प्रमुख मांगें, आइए जानते हैं।

Punjab Transport Department PTI

पंजाब ट्रांसपोर्ट की बसें। Photo Credit: PTI

पंजाब के सार्वजनिक परिवहन संगठनों ने तीन दिन की प्रस्तावित हड़ताल को स्थगित कर दिया है। यह हड़ताल सोमवार से बुधवार तक होने वाली थी, जिससे राज्य की बस सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती थीं। राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ आखिरी समय में बातचीत के बाद यूनियनों ने यह फैसला लिया।

सरकार ने सगठनों को 2 जून को उच्चस्तरीय बैठक का भरोसा दिया है, जिसमें वित्त मंत्री भी शामिल होंगे। यूनियनों ने अच्छी नीयत के साथ हड़ताल को टाल दिया है। सार्वजनिक परिवहन संगठनों के एलान के बाद राज्य को बड़ी राहत मिली है। 

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अगर मांगें नहीं पूरी हुईं तो 2 जून को फिर हड़ताल

लुधियाना यूनियन के उपाध्यक्ष सुखविंदर सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, 'अगर 2 जून की बैठक में हमारी मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ तो हम तुरंत नई हड़ताल की घोषणा कर देंगे।' संगठन का कहना है कि सरकार अगर मांगे नहीं मानती है तो दोबारा इसी तरह से हड़ताल पर विचार किया जाएगा। 

हड़ताल टालने के फैसले से लाखों लोगों को राहत मिली है। लुधियाना में संविदा कर्मियों के हड़ताल पर जाने का असर पूरे पंजाब में नजर आ सकता था। अब सरकार 2 जून की बैठक में क्या फैसला लेती है, इस पर सबकी नजर है। 

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क्या चाहते हैं संगठन?

यूनियनों की मुख्य मांगें हैं। सभी संविदा और ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी नौकरी दी जाए। समान काम के लिए समान वेतन मिले, आउटसोर्सिंग पर पूरी रोक लगे। सार्वजनिक परिवहन संगठनों की यह भी मांग है कि पंजाब और पिछले प्रदर्शनों में गिरफ्तार यूनियन नेताओं पर लगाए गए केस वापस लिए जाएं।

परिवहन संगठन नाराज क्यों हैं?

संगठन के नेताओं का आरोप है कि सरकार पीछे से निजीकरण कर रही है। उनका कहना है कि 'किलोमीटर स्कीम' के जरिए निजी बसों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे सरकारी बसों की हालत खराब हो रही है। हड़ताल टलने से लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। 

 

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