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धर्मांतरण विवाह से पैदा हुए बच्चे का धर्म क्या होगा? मां या बाप का? बन गया कानून

महाराष्ट्र सरकार ने गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन से हुई शादी से पैदा हुए बच्चे को उस धर्म को लेकर स्थिती साफ कर दी है। इसमें बताया गया है कि बच्चा मां-बाप में से किसका धर्म मानेगा?

Dharma Swatantrya Bill

देवेंद्र फडणवीस। Photo Credit- PTI

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महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य बिल (Dharma Swatantrya Bill, 2026) पेश किया। इस बिल के कानून बनने के बाद अब महाराष्ट्र में लालच, दबाव, धोखाधड़ी या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करने वालों खैर नहीं होगी। राज्य में लालच, दबाव, धोखाधड़ी से कराए गए धर्मांतरण को दंडनीय अपराध माना जाएगा। जबरन धर्म परिवर्तन करने वाले के सामान्य मामलों में 3 से 7 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अगर यह मामला महिलाओं, नाबालिगों या अनुसूचित जाति–जनजाति के लोगों से जुड़ा होगा, तो सजा सीधे 10 साल तक हो सकती है।

 

धर्म स्वातंत्र्य बिल में एक ऐसा प्रावधान किया गया है, जो कई राज्यों में बने धर्मांतरण विरोधी कानूनों से अलग बनाता है। इस कानून के मुताबिक, 'गैर-कानूनी' धर्म परिवर्तन से हुई शादी से पैदा हुए बच्चे को उस धर्म का माना जाएगा जिसका पालन ऐसी शादी/रिश्ते से पहले मां करती थी।

 

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मां के धर्म को मानेगा बच्चा

जहां हरियाणा जैसे कुछ राज्य धर्म परिवर्तन के बाद शादी और उससे पैदा हुए बच्चों के विरासत के अधिकारों को मान्यता देते हैं, वहीं महाराष्ट्र का यह नया बिल खासतौर पर बच्चे के धर्म को बताता है। बिल में कहा गया है, 'गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन से हुई शादी या शादी जैसे रिश्ते से पैदा हुआ कोई भी बच्चा ऐसी शादी या शादी जैसे रिश्ते से पहले मां के धर्म का माना जाएगा।'

धर्मांतरण करने वालों को करना होगा ये काम

धर्मांतरण करने वाले लोगों या जो ऐसा करना चाहते हैं, उनको 60 दिन पहले डीएम को लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा। साथ ही धर्म बदलने के बाद का 'घोषणा' जमा करना होगा। इस नियम को तोड़ने पर सात साल की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना, और दोबारा गलती करने पर 10 साल की सजा और 7 लाख रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है।

 

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धर्म स्वातंत्र्य विधेयक की प्रमुख बातें

  • प्रलोभन की परिभाषा में पैसा, मुफ्त शिक्षा, नौकरी, शादी का वादा, बेहतर जीवन शैली का आश्वासन या चमत्कारी इलाज के दावे भी शामिल हैं।
  • धर्मांतरण करने वालों को 60 दिन पहले डीएम को लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा।
  • बल की परिभाषा में सामाजिक बहिष्कार का डर, दैवीय अप्रसन्नता का भय या मनोवैज्ञानिक दबाव डालना भी शामिल किया है।
  • यदि विवाह केवल धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया हो, तो अदालत उसे अवैध घोषित कर सकती है।
  • धर्मांतरण जबरन साबित करने की जिम्मेदारी आरोपी व्यक्ति या संस्था पर होगी।

कर्नाटक, यूपी जैसे राज्यों में पहले से लागू

अगर यह बिल पास होते ही महाराष्ट्र धर्म बदलने को रेगुलेट करने वाला कानून बनाने वाला दसवां राज्य बन जाएगा। इससे पहले धर्मांतरण को दंडनीय अपराध मानने वाला कानून उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, हरियाणा, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य हैं। महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार का मानना है कि महाराष्ट्र का प्रस्तावित विधेयक अन्य राज्यों की तुलना में अधिक विस्तृत और स्पष्ट प्रावधानों वाला है। महाराष्ट्र में चमत्कारी इलाज या दैवीय उपचार के दावों को भी प्रलोभन की श्रेणी में शामिल किया गया है, जो कई पुराने कानूनों में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं था।


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