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मणिकर्णिका घाट पर ऐसा क्या हुआ कि मोदी सरकार के खिलाफ उतर आया पाल समुदाय?

मणिकर्णिका घाट पर कथित तौर पर अहिल्या बाई होल्कर की मूर्ति तोड़े जाने को लेकर एक बार फिर से विरोध का माहौल है। पाल कम्युनिटी के लोग विरोध कर रहे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: ANI

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वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर कथित अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति और अन्य मंदिरों को तोड़े जाने का विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। कई दिनों से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन में नया मोड़ आ गया है। अब पाल कम्युनिटी के लोगों ने सड़क पर जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया है। उनका आरोप है कि अहिल्या बाई होल्कर की मूर्ति तोड़ी गई है जो कि पूरी कम्युनिटी जो उनके मुताबिक पूरी कम्युनिटी का अपमान है।

 

इससे पहले इंदौर के अहिल्या बाई होल्कर चैरिटी ट्रस्ट ने भी इसकी आलोचना की थी। यह संस्था होल्कर स्टेट के अंतर्गत आने वाली संपत्तियों की देखरेख करती है। एक आधिकारिक बयान में संस्था के अध्यक्ष यशवंतराव होल्कर ने कहा था कि ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट का सबसे पहले रिनोवेशन 1791 में देवी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा किया गया था और इसलिए होल्कर परिवार के लिए इसका खासा महत्त्व है।

 

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क्या था मामला?

10 जनवरी 2026 को कथित तौर पर बिना किसी नोटिस या चेतावनी के वाराणसी की म्युनिसिपल अथॉरिटीज़ ने तोड़ना शुरू कर दिया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह काफी वायरल होन लगा। लोगों का आरोप था कि तोड़ते वक्त न ही ऐतिहासिकता का ध्यान रखा गया और न ही धार्मिक भावनाओं का।

पिछले हफ्ते भी हुआ था विरोध

इसके पहले पिछले हफ्ते मंगलवार को भी कथित तौर पर मूर्ति तोड़े जाने को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था। यह प्रदर्शन उसी स्थान से किया गया था जहां पर मूर्ति तोड़े जाने का आरोप लगाया गया था। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व समाजवादी पार्टी के नेता महेंद्र पाल पिंटू ने किया था। पिंटू पाल कम्युनिटी के नेशनल कन्वीनर हैं।


हालांकि, वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार का कहना था कि देवताओं की मूर्तियां और शिवलिंग सुरक्षित रखे हुए हैं और जो कुछ भी किया गया है वह मणिकर्णिका घाट को बेहतर बनाने के प्रोजेक्ट के तहत किया गया है।

दर्ज हुई थी FIR

वाराणसी पुलिस की सूचना के मुताबिक इस संबंध में तमिलनाडु के केवी सेतुराजम नाम के एक व्यक्ति ने एफआईआर दर्ज कराई थी। उनकी कंपनी मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार से जुड़ी सुविधाओं को दुरुस्त करने और घाट के सुंदरीकरण काम कर रही है।

 

प्रशासनिक अधिकारियों का यह भी आरोप है कि सोशल मीडिया के जरिए हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी तस्वीरें शेयर कर आम लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश की जा रहीं हैं। पुलिस का कहना है कि आम जनता में भ्रम और गुस्सा फैलाने के लिए यह किया जा रहा है। सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश हो रही है।

 

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योगी आदित्यनाथ ने भी कहा मंदिर तोड़े जाने की बात कहे जाने से बड़ी कोई बात नहीं हो सकती। उन्होंने कांग्रेस पर एआई वीडियो के जरिए लोगों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब जीर्णोद्धार का काम पूरा हो जाएगा तो तब अहिल्या बाई की प्रतिमा नई तरह से लगाई जाएगी।

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