राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा में घोषणा की कि राज्य के तीन प्रसिद्ध शहरों और कस्बों के नाम बदले जाएंगे। अब माउंट आबू को अबू राज कहा जाएगा, जहाजपुर का नया नाम यज्ञपुर होगा और कामा को कामवन के नाम से जाना जाएगा।
राजस्थान सरकार का कहना है कि लोगों की भावनाओं और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है। अरावली के पहाडों पर बसा माउंट आबू राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन है, जिसे दुनियाभर में लोग पसंद करते हैं।
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जिन शहरों के नाम बदले गए, वहां है क्या?
- माउंट आबू: राजस्थान का यह शहर पर्यटकों को खूब लुभाता है। यहां खूबसूरत झीलें और हरे-भरे जंगल हैं। यहां सालभर पर्यटक आते हैं। यह पर्यटन और तीर्थ स्थल के रूप में बहुत मशहूर है। अब इसे आबू राज के नाम से जाना जाएगा।
- जहाजपुर: यह शहर, भीलवाड़ा जिले का एक ऐतिहासिक कस्बा है। यहां का राजपूत इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। यहां कई पुराने मंदिर हैं, बावड़ियां और राष्ट्रीय धरोहर वाली इमारतें हैं। अब इस शहर का नाम यज्ञपुर होगा।
- कामा: भरतपुर का यह शहर, दुनिया में अब कामवन नाम से जाना जाएगा। यह ब्रज क्षेत्र में है। भगवान कृष्ण से जुड़ी कई तीर्थ स्थल आस पास में हैं। अब पौराणिक काल की कथाओं में जिस कामवन का जिक्र आता है, उसी के नाम पर इसका नामकरण किया गया है।
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माउंट आबू का नाम पुराना है तो, आबू राज क्यों पड़ा?
माउंट आबू का नाम, माउंट आबू, ब्रिटिश काल में पड़ा। इसके इतिहास को ब्रिटिश हुकूमत ने नजरअंदाज किया था। दशकों तक, आजादी के बाद भी इसके नाम बदलने की कवायद नहीं की गई। यह पौराणिक महत्व का शहर है।
पुराने जमाने में इस जगह को 'अर्बुदांचल' के नाम से जाना जाता था।'अर्बुद' एक पौराणिक नाग था, जिसके नाम पर इस पर्वत का नाम पड़ा। समय के साथ-साथ अर्बुदांचल बदलकर 'अर्बुद' हुआ, फिर 'आबू' हो गया।
कैसे मशहूर हुआ आबू?
19वीं शताब्दी के दौरान, जब अंग्रेजों ने इसे अपनी छावनी बना दी। उससे पहले यहां आदिवासी रहते थे। इस जगह को राजपूताना एजेंसी का मुख्यालय बना दिया। अंग्रेज अधिकारियों ने 'आबू' के आगे 'माउंट' शब्द जोड़ दिया।
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पौराणिक कथा क्या है?
शिव पुराण में एक प्रसंग आता है, जब भगवान शिव के नंदी बैल एक गहरी खाई में गिर जाते हैं। 'अर्बुद' नाम का एक नाग उन्हें सुरक्षित बाहर निकालता है। उसी वजह से इस जगह का नाम अर्बुद पड़ता है। बाद में यह बदलकर आबू बन गया।
एक मान्यता यह भी है कि यहां ऋषि वशिष्ठ ने धरती पर धर्म की रक्षा के लिए यज्ञ किया था। यहां एक अग्निकुंड बना था, जहां से एक युवक प्रकट हुआ था। वह पहला अग्निवंशी था। अर्बुद पर्वत क्षेत्र को अत्रि और वशिष्ठ जैसे ऋषियों की कर्मभूमि कहा जाता है। धनपाला के तिलकमंजरी सहित कई शिलालेखों और पुराने लेखों में इसका जिक्र मिलता है।
माउंट आबू का इतिहास क्या है?
यहां एक अचलगढ़ का किला है, जिसे परमार राजाओं ने बनाया था। यहां दिलवारा जैन मंदिर भी है। मंदिर का निर्माण विमल शाह ने 11वीं और 13वीं शताब्दी के बीच करवाया था। साल 1311 में देवरा-चौहान वंश के राव लुम्बा ने माउंट आबू पर जीत हासिल की। साल 1405 में जब चंद्रावती का विनाश हुआ, उसके बाद राव शस्मल ने सिरोही को अपना मुख्यालय बनाया। ब्रिटिश सरकार ने इसे सिरोही के महाराजा से इसे लीज पर लिया था।