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बेटी ने किया प्रेम विवाह, अर्थी निकाल श्मशान में दाह संस्कार; अब होगा श्राद्ध

मुजफ्फरपुर में एक युवती ने गांव के ही युवक से भागकर शादी कर ली, जिसके बाद नाराज परिवार ने अपनी बेटी की अर्थी निकाली और श्मशान में पहुंचकर दाह संस्कार किया।

Muzaffarpur love marriage

मुजफ्फरपुर प्रेम विवाह केस। Photo Credit- Social Media

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संजय सिंह, पटना। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने समाज और इंसानियत दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रेम विवाह करने वाली एक युवती को उसके ही परिजनों ने जीते जी मृत घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, गांव वालों के दबाव और सामाजिक बहिष्कार के डर से परिवार ने युवती के पुतले की अर्थी निकाली, श्मशान घाट पहुंचकर अंतिम संस्कार की पूरी रस्म भी निभाई। यह मामला जिले के मड़वन प्रखंड के करजा थाना क्षेत्र के एक गांव का है और अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

 

जानकारी के अनुसार, गांव की एक युवती करीब एक महीने पहले अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई थी। युवती के परिजनों ने करजा थाने में अपहरण की आशंका जताते हुए मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए युवती को बरामद कर कोर्ट में पेश किया। लेकिन कोर्ट में युवती ने जो बयान दिया, उसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।

 

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अपनी मर्जी से किया प्रेम विवाह

युवती ने अदालत में खुद को बालिग बताते हुए स्पष्ट कहा कि उसने अपनी मर्जी से प्रेम विवाह किया है और वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है। युवती ने सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस अधिकारियों को भी वीडियो और संदेश भेजकर अपनी सुरक्षा की मांग की थी। उसने साफ कहा था कि उस पर किसी तरह का दबाव नहीं है और उसने अपनी इच्छा से यह फैसला लिया है।

 

 

 

 

हालांकि युवती के इस निर्णय को उसका परिवार और गांव का समाज स्वीकार नहीं कर सका।

ग्रामीणों ने शुरू कर दिया था सामाजिक बहिष्कार

ग्रामीणों ने परिवार का सामाजिक बहिष्कार शुरू कर दिया। गांव में उनके यहां लोगों का आना-जाना बंद हो गया। सामाजिक कार्यक्रमों में परिवार को अलग-थलग कर दिया गया। बताया जाता है कि समाज के कुछ लोगों ने परिवार के सामने शर्त रखी कि यदि उन्हें दोबारा समाज में शामिल होना है, तो उन्हें युवती को मृत मानना होगा।

समाज के दबाव से परेशान परिवार झुका

समाज के दबाव और तानों से परेशान परिवार आखिरकार झुक गया। परिजनों ने युवती के प्रतीक के रूप में एक पुतला तैयार किया। फिर गांव में उसी तरह अर्थी निकाली गई, जैसे किसी मृत व्यक्ति की निकाली जाती है। महिलाएं विलाप करती रहीं और लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। इसके बाद श्मशान घाट पहुंचकर पूरे रीति-रिवाज के साथ पुतले का दाह संस्कार किया गया। 

 

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घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए 

बताया जा रहा है कि परिवार ने युवती के नाम का श्राद्ध कर्म करने की भी बात कही है। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ देश में महिलाओं को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का कानूनी अधिकार मिला हुआ है, वहीं दूसरी ओर समाज के कुछ हिस्सों में आज भी प्रेम विवाह को अपराध की तरह देखा जाता है। सामाजिक प्रतिष्ठा और जातीय दबाव के नाम पर परिवारों को ऐसे अमानवीय कदम उठाने पड़ रहे हैं।

 

स्थानीय मुखिया विकास कुमार सिंह ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि गांव में सामाजिक दबाव की वजह से परिवार ने यह कदम उठाया। वहीं करजा थानाध्यक्ष रामकृष्ण परमहंस ने बताया कि युवती का बयान पहले ही दर्ज किया जा चुका है और वह बालिग है। उन्होंने कहा कि दाह संस्कार जैसी घटना की आधिकारिक सूचना पुलिस को नहीं मिली है, लेकिन मामला सामने आने के बाद इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

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