उत्तर प्रदेश के नोएडा में सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार आखिरकार प्रशासन ने चार दिन बाद मंगलवार देर शाम पानी से निकाल ली। सरकारी अधिकारियों और भारी भीड़ के बीच एक बड़ी सी क्रेन ने मृतक इंजीनियर की ग्रैंड विटारा कार को पानी से निकाला। युवराज की कार सेक्टर-150 में कंस्ट्रक्शन साइट पर पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में शनिवार को गिर गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई। यह गड्ढा एक बिल्डिंग का बेसमेंट बनाने के लिए खोदा गया था और 20 फीट से ज्यादा गहरा था, जिसमें बारिश और सीवर का पानी भरा हुआ था।
इस मामले में नोएडा प्रशासन की घोर लापरवाही भी सामने आ रही है कि इतने बड़े शहर में भी कार को पानी से निकालने में चार दिन का समय लग गया। हालांकि, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मंगलवार को ही एक रियल एस्टेट डेवलपर को गिरफ्तार किया।
आइए जानते हैं कि इंजीनियर के मौत मामले में अबतक नया क्या हुआ?
- हादसे में शामिल कार, मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा कार को घटना के चार दिन बाद मंगलवार को बाहर निकाल ली गई। कार निकालने के बाद, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स (NDRF) टीम ने गाड़ी को एक ट्रक में लोड किया। पानी में डूबी कार का पता लगाने का मंगलवार को ऑपरेशन शुरू हुआ था।
- मृतक यवराज मेहता के परिवार ने बचाव के काम में गंभीर चूक का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि 'गोताखोरों की कमी' के कारण युवराज की जान चली गई। युवराज के पिता, राजकुमार मेहता ने बताया, 'मौजूद अधिकारी और स्टाफ उसे बचा नहीं पाए। उनके पास कोई गोताखोर नहीं थे।' राजकुमार ने आरोप लगाया कि उनका बेटा लगभग दो घंटे तक पानी में जिंदा था। वह मदद के लिए तड़पता रहा और आवाज लगाता रहा, जबकि मौके पर जमा लोग वीडियो बनाते रहे।
- इंडियन एक्सप्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि पहली कॉल शनिवार को रात 12.06 बजे राजकुमार मेहता ने पुलिस को किया था। नौ पुलिस अधिकारियों की एक टीम रात 12.30 बजे तक घटनास्थल तक पहुंच गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि गाजियाबाद में तैनात SDRF और NDRF को सुबह 1.02 बजे से 1.10 बजे के बीच कॉल किया गया। SDRF सुबह 3:45 बजे और NDRF सुबह 4.15 बजे मौके पर पहुंची।
- मामले में लापवाही सामने आने के बाद यूपी सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के CEO को हटा दिया है, जबकि एक जूनियर अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है और एक बिल्डर को गिरफ्तार कया गया है। नोएडा अथॉरिटी के एडिशनल चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर सतीश पाल ने बताया, 'जांच से पता चलेगा कि यह जमीन किसकी थी, किसे अलॉट की गई थी और इसके मेंटेनेंस के लिए कौन जिम्मेदार था। वह सड़क ऐसे एरिया में है जो अभी पूरी तरह से डेवलप नहीं हुआ है।'
- इस बीच, उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग ने 2023 में इसी हादसे वाले गड्ढे में से पानी निकालने की जरूरत बताई थी, जिसके लिए राज्य के अधिकारियों ने नोएडा अथॉरिटी को पत्र लिखा था। सिंचाई विभाग ने गड्ढे के पानी को हिंडन नदी में डालने के लिए सेक्टर 150 में हेड रेगुलेटर लगाने का निर्देश दिया था।
- बता दें कि नोएडा के सेक्टर-150 में 16 जनवरी को हुई घटना में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। उसकी कार निर्माणाधीन स्थल के पास पानी से भरे गड्ढे में गिर गयी थी और उस निर्माणाधीन स्थल पर कोई अवरोधक भी नहीं था। यह गड्ढा एक मॉल के भूमिगत तल के निर्माण के लिए खोदा गया था। इस घटना में लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं।