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'पुलिस स्टेशन साफ करो', दलित-आदिवासियों की जमानत पर कोर्ट ने रखी शर्त, अब हंगामा

ओडिशा के रायगड़ा जिले में वेदांता से जुड़े बाक्साइट खनन प्रोजेक्ट के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों कुछ आदिवासियों को गिरफ्तार किया गया था। अब कोर्ट के एक फैसले पर हंगामा हो रहा है।

Anti Vedanta Protest

ओडिशा में वेदांता के खिलाफ प्रदर्शन पर उतरे लोग। Photo Credit: Social Media

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ओडिशा के रायगड़ा और कलाहांडी जिलों के तिजिमाली इलाके में वेदांता कंपनी के नए बाक्साइट खदान के खिलाफ दलित और आदिवासी ग्रामीण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन, कई साल से चल रहा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 2023 से अब तक कम से कम 40 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 8 लोगों को जमानत देते समय अदालत ने एक अजीब शर्त रखी, जिस पर अब हंगामा मचा है।

ओडिशा हाईकोर्ट और जिला अदालतों ने 2023 से अब तक कम से कम आठ मामलों में ऐसे विवादास्पद जमानत आदेश दिए हैं। इन आदेशों में खनन विरोधी प्रदर्शनकारियों को रोजाना सुबह पुलिस स्टेशन की सफाई करने को कहा गया है। न्यूज वेबसाइट आर्टिकल 14 की एक रिपोर्ट के सामने आने के बाद, लोग इन फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। 

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क्या कह रहे हैं लोग?

अधिवक्ताओं और सिविल राइट्स संगठनों ने इन आदेशों की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना कि यह जबरन मजदूरी है, जो संविधान के अनुच्छेद 23 का उल्लंघन है। साथ ही इससे लोगों की गरिमा और समानता के अधिकार का भी हनन होता है। यह समता की बात करने वाले अनुच्छेद 14 और प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता से जुड़े अनुच्छेद 21 का साफ उल्लंघन है। 

जमानत की किन शर्तों पर उठ रहे सवाल?

जमानत की शर्त में एक शर्त यह भी थी कि आरोपियों को हर सुबह 6 से 9 बजे तक पुलिस स्टेशन की सफाई करनी होगी। 26 वर्षीय दलित युवक कुमेश्वर नायक पर भी यही शर्त लगाई गई थी। मई 2025 में ओडिशा हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए कहा कि उन्हें काशीपुर पुलिस स्टेशन की सफाई करनी होगी। दो महीने तक उन्होंने ब्रूम और फिनाइल से पुलिस स्टेशन साफ किया। 

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नाराज क्यों हैं दलित और आदिवासी समाज के लोग?

कुमेश्वर नायक ने आर्टिकल 14 के साथ बातचीत में कहा, 'जेल से छूटने की खुशी की जगह हमें अपमान सहना पड़ा। हम जानते हैं कि यह आदेश हमें अपमानित करने के लिए दिया गया था। इन आठ मामलों में छह दलित और दो आदिवासी हैं।

कोर्ट के फैसले को जातिवादी बता रहे लोग

रायगड़ा जिला अदालत के दो जजों और हाईकोर्ट के एक जज ने ऐसे आदेश दिए। आदिवासी और दलित समुदाय के हितों के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि ये आदेश जातिवादी हैं क्योंकि सफाई का काम ऐतिहासिक तौर पर दलित समुदाय पर थोपा जाता रहा है।

वेदांता के खिलाफ प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खदान शुरू होने से उनके गांव मालिपदार और तिजिमाली पूरी तरह उजड़ जाएंगे। सैकड़ों परिवारों को अपनी जमीन, जंगल और पहाड़ियां छोड़नी पड़ेंगी। उनका आरोप है कि ग्राम सभा की सहमति जबरन और फर्जी दस्तावेजों के सहारे ली गई है।

वेदांता कंपनी का कहना है कि यह परियोजना 9 मिलियन टन बाक्साइट प्रति वर्ष निकालेगी, जिससे लांझीगढ़ स्थित उनके एल्यूमिना रिफाइनरी को कच्चा माल मिलेगा।

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प्रदर्शनकारियों पर क्या आरोप लगे हैं?

 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंगा, सरकारी काम में बाधा और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कुछ परिवारों में एक ही परिवार के 5 से 7 सदस्यों पर मुकदमे चल रहे हैं। महिलाएं अब विरोध का मुख्य मोर्चा संभाल रही हैं। कई महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया है। एक महिला नेता नारिंग देई मांझी को भी जमानत पर रिहा करते समय सफाई की शर्त लगाई गई। गिरफ्तारियों और इन शर्तों के बावजूद गांववाले कहते हैं कि वे अपनी जमीन, जंगल और पहाड़ियों के लिए लड़ाई नहीं छोड़ेंगे।  

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