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मगरमच्छ से बचने के लिए करने लगे पूजा, चढ़ाते हैं फल, दूध, चीनी और केला

लोग खारे पानी के मगरमच्छ की मूर्ति बनाकर पूजा कर रहे हैं। लोग इसलिए पूजा कर रहे हैं ताकि उनके ऊपर हमले रुक जाएं।

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ओडिशा के भितरकनिका नेशनल पार्क के किनारे बसे गांवों में लोग अब एक खास तरीके से अपनी सुरक्षा की कोशिश कर रहे हैं। यहां के ज्यादातर अविवाहित लड़कियां और ग्रामीण नदी घाटों के पास मिट्टी से बने खारे पानी वाले मगरमच्छ (salt-water crocodile) की मूर्ति बनाकर उनकी पूजा कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे मगरमच्छ के हमले से बचाव होगा।

 

यह रस्म हाल ही में एकमानिया, नलापाही, दक्षिणाडिया और आसपास के अन्य नदी किनारे वाले गांवों में की गई। एकमानिया गांव की रहने वाली 17 साल की बैसाखी बेहरा ने कहा, 'हमने मगरमच्छ भगवान को खुश करने के लिए फूल, दूध, केला और चीनी चढ़ाई। ताकि हमारी जान बच जाए।'

 

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मछली पकड़ने में करते हैं हमला

नलापाही गांव की 16 साल की मानसी बेहरा ने बताया, 'मेरे पिता सिबाराम बेहरा की 4 मई 2022 को ब्राह्मणी नदी में नहाते समय मगरमच्छ ने जान ले ली थी। मैंने मिट्टी के मगरमच्छ की मूर्ति को माला पहनाई।'

 

दक्षिणाडिया गांव के 45 साल के संतोष बेहरा ने कहा, 'हम मगरमच्छों का सम्मान करते हैं और उन्हें पूजनीय मानते हैं।'

 

ये लोग अक्सर मगरमच्छों से भरी नदियों और खाड़ियों में केकड़ा और मछली पकड़ते हैं, ताकि बेचकर कुछ पैसे कमा सकें। लेकिन पार्क के पानी और आसपास के इलाकों में हर साल 12 से 15 लोग मगरमच्छ के हमले में मर जाते हैं।

बचने के लिए हमला

पिछले पांच साल से लोग निराश होकर मगरमच्छों की पूजा करने लगे हैं, ताकि हमले रुक जाएं। ये ज्यादातर लोग मछली पकड़ने, केकड़ा पकड़ने, शहद इकट्ठा करने, खेती और लकड़ी इकट्ठा करने का काम करते हैं। लेकिन उनके पास जमीन और संसाधन कम हैं, इसलिए उन्हें नदी में जाना पड़ता है, जो उनकी आजीविका का साधन है। राजनगर के पूर्व विधायक अलेक्स जेना ने कहा, 'भितरकनिका में इंसान और खारे पानी वाले मगरमच्छ के बीच एक भयानक लड़ाई चल रही है।'

की गई बैरिकेडिंग

एकमानिया ग्राम पंचायत की सरपंच अहल्या बिस्वाल ने बताया, 'हमारे समाज के गरीब लोग मैंग्रोव जंगल और नदी पर निर्भर रहते हैं। लेकिन इकोसिस्टम बचाने के बड़े कारण से उनकी जरूरतें दब जाती हैं। हमारे पंचायत में तीन साल में तीन लोग मगरमच्छ के हमले में मारे गए।'

 

प्रसिद्ध हर्पेटोलॉजिस्ट डॉ. सुधाकर कर ने कहा, 'लोगों को भितरकनिका की नदियों और खाड़ियों में मछली पकड़ने नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह बहुत खतरनाक है।'

 

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भितरकनिका के असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) मनस दास ने बताया, 'मगरमच्छों की पूजा से उनकी जान नहीं बचेगी। हमने पार्क के आसपास लगभग 120 नदी घाटों और तालाबों पर बाड़ लगाई है। ग्रामीणों को निर्देश दिया है कि वे पानी में न जाएं और सिर्फ बाड़ वाले इलाके में पानी इस्तेमाल करें।'

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