पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होंगे और तमाम राजनीतिक दल इन चुनावों के लिए मैदान में उतर चुके हैं। आम आदमी पार्टी ने अपने नेताओं को रणनीति बनाने और गांवों में उतार दिया है। कांग्रेस पार्टी ने 3 महीने को रोडमैप बनाकर काम शुरू कर दिया है। अकाली दल से सुखबीर सिंह बादल लगातार रैलियां कर रहे हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल में मिली जीत के बाद अब भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि वह पंजाब में भी सरकार बनाएंगे। 2027 चुनाव से पहले सभी दलों की एक अहम परीक्षा निकाय चुनावों में हो रही है।
पंजाब में 105 स्थानीय निकायों में चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों को सत्ता का सेमीफाइनल कहा जा रहा ह और 26 मई को जनता वोट करेगी। इन चुनावों में पंजाब की 117 में से 90 विधानसभा क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। इन चुनावों के नतीजे राजनीतिक दलों के लिए आगामी चुनाव से पहले बहुत कुछ तय कर देंगे। यह दिखाएंगे कि किस राजनीतिक दल की पकड़ शहरों में मजबूत है।
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सत्ता का सेमीफाइन
पंजाब की राजनीति पर नजर रखने वाले राजनीतिक जानकार इन चुनावों को सत्ता के सेमीफाइनल के रूप में ही देख रहे हैं। ये चुनाव सभी दलों के लिए इसलिए अहम हैं, क्योंकि ये चुनाव सीधे तौर पर एक करोड़ से ज्यादा शहरी मतदाताओं से जुड़े हुए हैं। इन चुनावों में 90 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टियों का टेस्ट होगा। सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है ताकि चुनाव से पहले जीत मिल सके और उसका फायदा विधानसभा चुनाव में पार्टियों को मिले।
बीजेपी के लिए क्यों अहम यह चुनाव?
भारतीय जनता पार्टी अब पंजाब में सरकार बनाने का सपना देख रही है। बीजेपी पहले सूबे में अकाली दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ती थी और इस गठबंधन को हिंदू-सिख एकता के तौर पर देखा जाता था। बीजेपी हिंदू वोटर्स को आकर्षित करती थी। बीजेपी के लिए यह चुनाव इसलिए अन्य तमाम दलों से अहम हो जाता है क्योंकि बीजेपी का कोर वोटर हिंदू ही है और ज्यादातर हिंदू वोटर शहरी इलाकों में बसे हुए हैं। ऐसे में शहरी निकायों के इन चुनावों में बीजेपी की कड़ी परीक्षा है।
बीजेपी अकाली दल से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ी है लेकिन उसे कुछ खास सफलता नहीं मिली है। इसका मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्र में पार्टी की कमजोर पकड़ है। पिछले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न पर नजर डालें तो साफ नजर आता है कि बीजेपी शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूत है।
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गैर-सिख आबादी पर बीजेपी की नजर
भारतीय जनता पार्टी गैर-सिख आबादी को पूरी तरह से अपने साथ जोड़ना चाहती है। ज्यादातर गैर-सिख आबादी शहरों में रहती है। शहरों में बीजेपी को पंथक राजनीति वाले दलों से कम चुनौती मिलती है। यानी यहां ज्यादातर सीटों पर मुकाबला अकाली दल और अन्य पंथक पार्टियों के बजाय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से होगा। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों की ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में पकड़ है। निकाय चुनाव भले ही राजनीतिक रूप से इतने अहम ना हों लेकिन कुछ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से यह काफी ज्यादा अहम हो जाते हैं। अगर बीजेपी इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करती है तो पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ जाएगा।