logo

मूड

ट्रेंडिंग:

पैसों की जरूरत या राजनीति, पानी के बहाने क्या हासिल करना चाहते हैं भगवंत मान?

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्थान से 1.44 लाख रुपये की मांग की है। उनका कहना है कि राजस्थान ने पंजाब से जो पानी लिया है यह उसकी रॉयल्टी है।

Bhagwant Mann

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान। (Photo Credit: Bhagwant Mann/X)

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

पंजाब की राजनीति में आजकल पानी का मुद्दा काफी ज्यादा चर्चा में है। पंजाब सीएम भगवंत मान के राजस्थान से पानी के बदले 1.44 लाख करोड़ की मांग कर दी है। उनका कहना बै कि एक एग्रीमेंट के हिसाब से राजस्थान पंजाब को पानी के बदले रॉयल्टी देता था लेकिन 1960 से राजस्थान ने ऐसा करना बंद कर दिया है। ऐसे में सीएम भगवंत मान कह रहे हैं कि राजस्थान को पंजाब का बकाया चुकाना चाहिए या फिर पानी लेना बंद करना चाहिए। 

 

राजस्थान सरकार ने पंजाब सरकार की इस मांग को ठुकरा दिया है। राजस्थान सरकार में जलसंसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि साल 1920 का समझौता  ब्रिटिश सरकार, बहावलपुर (अब पाकिस्ताान में) और बीकानेर रियासत के बीच हुआ था। उन्होंने बताया कि इस समझौते के तहत रियासत की लगभग 5 लाख एकड़ जमीन के लिए पानी देना तय किया गया। था। इस पानी के बदले चार्ज ब्रिटिश सरकार को देना था, पंजाब को नहीं।

 

यह भी पढ़ें: ट्रांसजेंडर: संसद से इतिहास के पन्नों तक, कहानी अनसुनी क्यों रही?

आजादी के बाद हुए तीन समझौते

सुरेश सिंह रावत ने कहा कि आजादी के बाद रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के पानी के उपयोग और बंटवारे पर 3 बार समझौता हुआ है। यह समझौता 1955,1959 और 1981 में संबंधित राज्यों से बातचीत के बाद किए गए थे। इन समझौतों में कहीं भी रॉयल्टी या किसी अन्य चार्ज का प्रावधान नहीं किया गया। मंत्री ने कहा कि पंजाब की तरफ से रॉयल्टी की मांग तथ्यों से परे और गैर कानूनी है।

कोर्ट जाने की तैयारी में पंजाब सरकार

पंजाब के सीएम भगवंत मान लगातार पंजाब के पानी के मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने तो हरियाणा के साथ भी पानी के मामले में बातचीत करने की बात कही है। एक बार दोनों राज्यों के बीच बैठक भी हो चुकी है। राजस्थान सरकार के मांग खारिज करने के बाद पंजाब के सीएम ने कहा कि अब वह इस मामले को कोर्ट में ले जाएंगे और राजस्थान अब वहीं अपना पक्ष रखे। 

 

पंजाब के मुख्यमंत्री ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, 'पहले तो वह ऐतराज ही करेंगे। चोरी करने के बाद कोई चोर नहीं कहता कि मैंने चोरी की है। वह तो बाद में मनवाना पड़ता है। पकड़ा तो वह ट्रांसफार्मर से तेल चोरी के आरोप में जाता है, लेकिन बाद में 14-15 मोटरें चोरी करने और दो-चार मोटरसाइकिल चोरी करने की बात कबूल लेता है। उसी तरह हम कोर्ट में केस लड़ेंगे। वह जो भी कहना है, कोर्ट में कह दें।'

पैसों की जरूरत या सिर्फ राजनीति

पंजाब की राजनीति में पानी का मुद्दा काफी ज्यादा अहम है। पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां नदियों के पानी को लेकर सियासत लंबे समय से होती आई है। राज्य की पार्टियां राष्ट्रीय पार्टियों पर पंजाब के साथ धोखा करने का दावा करती हैं और कहती हैं कि केंद्र सरकारों ने राज्य का पानी अन्य राज्यों को दे दिया। अब इस पानी के विवाद पर सियासत तेज हो गई है।

 

बता दें कि अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिनके लिए एक साल से भी कम समय रह गया है। फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। ऐसे में पानी का मु्द्दा उठाकर भगवंत मान केंद्र की भारतीय जनता पार्टी, जिसकी राजस्थान और हरियाणा में सरकार है, को कटघरे में खड़ा कर रही है। वहीं, पंजाब के पानी को दूसरे राज्यों को देने के लिए भगवंत मान कांग्रेस की पूर्व की सरकारों पर भी हमलावर रहते हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस की सरकारों ने पंजाब के पानी के साथ समझौता किया और पंजाब के खेतों तक पानी पहुंचाने की बजाय अन्य राज्यों को पानी दिया।

 

भगवंत मान के राजस्थान से पानी के बदल मुआवजा मांगने की बात में कानूनी तौर पर भले ही दम ना हो लेकिन आने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से यह मुद्दा काफी अहम माना जा रहा है। भगवंत मान और आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को कांग्रेस और बीजेपी दोनों के खिलाफ भुना सकती है। ऐसे में पार्टी को किसानों का साथ मिलने की उम्मीद है। पंजाब में ज्यादातर परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से किसानी से जुड़े हुए हैं। 

 

यह भी पढ़ें: 'लॉकडाउन की बात अफवाह है...', केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने बता दिया सच

अकाली दल भी उठा रहा मुद्दा

पंजाब में सिर्फ भगवंत मान ही नहीं बल्कि लंबे समय तक राज्य की राजनीति का अहम हिस्सा रह चुकी और सरकार का हिस्सा रह चुकी पार्टी शिरोमणि अकाली दल भी पानी के मुद्दे को उठा रही है। पार्टी प्रधान सुखबीर बादल की अध्यक्षता में वैसाखी से पहले पार्टी राज्यभर में 44 रैलियां कर रही है। इन रैलियों में पार्टी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। सुखबीर बादल ने कहा कि राजस्थान को पानी देना पंजाब के हकों पर डाका डालने जैसा है। अन्य स्थानीय राजनीतिक दल भी पानी के मु्द्दे पर मुखरता से बोल रहे हैं। ऐसे में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव में पानी का मुद्दा एक अहम मुद्दा बन सकता है।

Related Topic:#Punjab News

और पढ़ें