संजय सिंह, पटना। पूर्णिया जिले के बैसा प्रखंड में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक सीएसपी केंद्र से जुड़ा करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। मोजाबारी गांव में संचालित ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) के संचालक इंतसार आलम की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, उसने बैंकिंग व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने पिछले पांच-छह वर्षों के दौरान 269 खाताधारकों के खातों से करीब दो करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी और ट्रांसफर किया। जांच में सामने आया है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों के खातों से रकम उड़ाता था। शुरुआत में वह खातों से छोटी-छोटी रकम निकालता और दूसरे खातों में समायोजित कर देता था ताकि किसी ग्राहक को शक न हो। यही वजह रही कि लंबे समय तक यह खेल दबे पांव चलता रहा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने वर्ष 2020 से ही इस फर्जीवाड़े की शुरुआत कर दी थी और धीरे-धीरे रकम करोड़ों तक पहुंच गई।
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ग्राहक कैसे ठगे जाते थे?
ग्रामीणों के मुताबिक सीएसपी केंद्र पर बैंकिंग कार्य कराने आने वाले ग्राहकों से बार-बार अंगूठे के निशान लिए जाते थे। खाते की जांच, निकासी, जमा या आधार आधारित बैंकिंग सेवा के नाम पर ग्राहकों को मशीन पर अंगूठा लगवाया जाता था। इसी दौरान आरोपी आइएमपीएस, आरटीजीएस, मोबाइल बैंकिंग और नेट बैंकिंग के जरिए खातों से रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देता था। अधिकांश खाताधारक तकनीकी जानकारी के अभाव में वर्षों तक इस धोखाधड़ी से अनजान बने रहे।
बैंक स्टेटमेंट निकालने के बाद लोगों को मिली जानकारी
कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें तब शक हुआ जब खाते में जमा राशि धीरे-धीरे कम होने लगी। कुछ लोगों के खाते से हजारों तो कुछ के खाते से लाखों रुपये गायब पाए गए। बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर फर्जी ट्रांजैक्शन का खुलासा हुआ, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। घटना के सामने आने के बाद इलाके के ग्राहकों में दहशत और आक्रोश दोनों है। लोग बैंकिंग सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
रौटा थाना पुलिस ने आरोपी के पास से सैमसंग लैपटॉप, फिंगरप्रिंट स्कैनर, पासबुक प्रिंटर और आईफोन समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। पुलिस को आशंका है कि इन्हीं डिजिटल उपकरणों की मदद से फर्जी ट्रांजैक्शन को अंजाम दिया जाता था। अब साइबर और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
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पुलिस कर रही है मामले की जांच
जांच अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं हो सकता। बैंकिंग लेनदेन, मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और खातों की गतिविधियों की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं तथा जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी संभव है।
इस पूरे मामले ने ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैल रहे डिजिटल बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां लोग तकनीकी रूप से जागरूक नहीं हैं और सीएसपी संचालकों पर आंख बंद कर भरोसा करते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों की यह ठगी आखिर इतने वर्षों तक बिना किसी निगरानी के कैसे चलती रही।