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पुणे पोर्श केस: 3 को जमानत, SC  ने कहा, 'बच्चों के बिगड़ने के जिम्मेदार मां-बाप'

पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। साथ ही कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों को कार की चाबियां केवल मौज-मस्ती के लिए देना माता-पिता की बड़ी गलती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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महाराष्ट्र के पुणे में हुए चर्चित पोर्श कार हादसे के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। आरोपी अमर गायकवाड़, आदित्य सूद और आशीष मित्तल को इस केस में जमानत मिली है। इसके अलावा कोर्ट ने बच्चों के माता-पिता पर सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने उन माता-पिताओं को भी आड़े हाथों लिया जो अपने बच्चों पर काबू नहीं रख पाते। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि बच्चों को कार की चाबियां थमाना और उन्हें अय्याशी के लिए बेहिसाब पैसे देना बिल्कुल गलत है। ऐसी घटनाओं के लिए काफी हद तक उनके माता-पिता ही जिम्मेदार हैं।

 

जमानत पाने वाले आरोपियों में अमर गायकवाड़ पर आरोप था कि उसने नाबालिग आरोपी का ब्लड सैंपल बदलने के लिए हॉस्पिटल के स्टाफ को 3 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। वहीं, आदित्य सूद और आशीष मित्तल पर आरोप था कि उन्होंने अपने खून के नमूने उन दो नाबालिगों को बचाने के लिए दिए थे, जो एक्सीडेंट के वक्त मुख्य आरोपी लड़के के साथ कार में बैठे थे। इससे पहले पिछले साल दिसंबर में हाई कोर्ट ने इनकी जमानत अर्जी ठुकरा दी थी लेकिन अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने इन्हें राहत दे दी है।

 

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क्या था पूरा मामला?

यह हादसा 19 मई 2024 को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में हुआ था। वहां नशे में धुत एक 17 साल के लड़के ने अपनी तेज रफ्तार पोर्श कार से दो आईटी प्रोफेशनल्स को टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस केस ने तब पूरे देश को चौंका दिया था जब शुरुआत में किशोर न्याय बोर्ड (JJB) ने आरोपी लड़के को सिर्फ 'सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने' जैसी मामूली शर्त पर जमानत दे दी थी।

 

जांच में हुआ था बड़ा खुलासा

भारी विरोध के बाद जब पुलिस ने दोबारा जांच शुरू की, तो पता चला कि आरोपी को बचाने के लिए उसके रसूखदार परिवार ने गहरी साजिश रची थी। नाबालिग का ब्लड सैंपल ससून अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की मदद से बदला गया था ताकि रिपोर्ट में शराब की पुष्टि न हो सके। 

 

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इस फर्जीवाड़े के आरोप में लड़के के माता-पिता, विशाल और शिवानी अग्रवाल, डॉक्टर अजय तावरे, श्रीहरि हलनोर और कुछ बिचौलियों सहित कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल, मुख्य आरोपी नाबालिग को जून 2025 में ही सुधार गृह से रिहा करने का आदेश दे दिया गया था। साथ ही ब्लड सैंपल बदलने के मामले में बाकी आरोपियों पर कार्रवाई जारी थी।


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