उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मंगलवार सुबह एक सरकारी कर्मचारी के परिवार के पांच सदस्य अपने घर के एक बंद कमरे में गोली लगने से मरे हुए पाए गए। पुलिस ने इसे हत्या-आत्महत्या का मामला मानकर जांच शुरू कर दी है।
इन मौतों का पता तब चला जब पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस घर में घुसी तो उन्हें सिंचाई विभाग में क्लर्क 42 साल के अशोक राठी, 40 साल की उनकी पत्नी अजंता, 72 साल की मां विद्यावती और उनके दो बेटे 15 साल के कार्तिक व 15 साल के देव के शव मिले। अधिकारियों ने अलग-अलग कमरों से तीन देसी पिस्तौल बरामद कीं और पाया कि हर पीड़ित को सिर या सीने में गोली लगी थी, जिससे पता चलता है कि गोलियां बहुत करीब से चलाई गई थीं।
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बहन को भेजा मैसेज
पुलिस ने जल्द ही डिजिटल और फिजिकल सबूतों के ज़रिए यह जानने की कोशिश की कि इस घटना के अंतिम कुछ घंटों में क्या हुआ होगा? घटना से कुछ समय पहले अशोक ने एक रिश्तेदार को सोशल मीडिया पर मैसेज भेजा था, जिसमें लिखा था, 'मैंने बहुत बड़ी गलती की है,' पुलिस ने इस लाइन को अपनी जांच के लिए बहुत अहम बताया।
फोरेंसिक टीमों ने घर को सील कर दिया और मोबाइल फोन, बैलिस्टिक सैंपल और दूसरी चीज़ें इकट्ठा कीं, जबकि अधिकारियों ने घटनाओं के क्रम को फिर से बनाने के लिए कमरों के लेआउट की जांच की।
डिप्रेशन से जूझ रहे थे
पुलिस सूत्रों ने बताया कि अशोक चार साल पहले अपने पिता की मौत के बाद से डिप्रेशन से जूझ रहे थे और कोविड महामारी के दौरान बीमार पड़ने के बाद उसकी हालत और खराब हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, 'वह पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI), चंडीगढ़ से इलाज करवा रहा था। उसने पिछले साल भी परिवार को नींद की गोलियां देकर मारने की कोशिश की थी।'
पुलिस के मुताबिक राठी ने घटना से कुछ देर पहले अपनी बहन मोहिनी को एक वॉइस नोट भेजा था। अधिकारी ने कहा, 'वॉइस नोट में उसने कहा था कि उसने एक बहुत बड़ी गलती की है और वह अपनी ज़िंदगी खत्म कर रहा है। उसने अपनी बहन के साथ एटीएम कार्ड के पासवर्ड भी शेयर किए थे।'
FIR न दर्ज करने की अपील
परिवार वालों ने FIR दर्ज न करवाने का फैसला किया और रिक्वेस्ट की कि अंतिम संस्कार परिवार के पैतृक गांव में किया जाए। पड़ोसियों ने परिवार को शांत स्वभाव का बताया और कहा कि उन्हें किसी झगड़े या परेशानी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
पुलिस ने कहा कि हत्याओं के सही क्रम की पुष्टि करने और यह पता लगाने में कि मौतें एक ही, सोची-समझी योजना का नतीजा थीं या इसमें कोई और आपराधिक तत्व शामिल था, पोस्टमॉर्टम जांच अहम होगी।