उत्तराखंड सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया कि कक्षा 8 तक चलने वाले स्कूलों की मान्यता लेने की प्रक्रिया अब आसान की जाएगी। सरकार के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था को सरल और बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
सरकार के इस फैसले से खासकर उन 400 से ज्यादा मदरसों को बड़ी राहत मिलेगी, जो अभी कक्षा 1 से 8 तक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अब इन स्कूलों को मान्यता लेने के लिए राज्य स्तर तक भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी, बल्कि जिले के स्तर पर ही उनका काम आसानी से पूरा हो जाएगा।
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जिला समितियों को मिली जिम्मेदारी
संशोधित नियमों के तहत अब प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूलों की मान्यता का अधिकार जिला स्तरीय शिक्षा समितियों को दे दिया गया है। पहले सभी अल्पसंख्यक संस्थानों को रामनगर स्थित बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से ही मान्यता लेनी होती थी। जिससे प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती थी। यह नया प्रावधान जुलाई 2026 से लागू होगा।
हालांकि, कक्षा 9 से 12 तक के स्कूलों के लिए व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन संस्थानों को पहले की तरह ही रामनगर बोर्ड से मान्यता लेनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे उच्च स्तर की शिक्षा की गुणवत्ता पर नियंत्रण बना रहेगा।
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अन्य फैसलों को मिली मंजूरी
कैबिनेट ने हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 से जुड़े निर्माण कार्यों को भी गति देने के लिए नए प्रावधान लागू किए हैं। अब मेला अधिकारी 1 करोड़ रुपये तक के कार्यों को मंजूरी दे सकेंगे। जबकि 5 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट गढ़वाल मंडल आयुक्त द्वारा स्वीकृत होंगे।
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इसके अलावा, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के नियमों में बदलाव करते हुए एसिड अटैक पीड़ितों को मुफ्त कानूनी सहायता के दायरे में शामिल किया गया है। मधुमक्खी पालन नीति को मंजूरी देकर ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम उठाया गया है। साथ ही खनिज रॉयल्टी में बढ़ोतरी और 250 नई बसों की खरीद को मंजूरी देकर विकास कार्यों को और गति देने का प्रयास किया गया है।