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मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए मिली थी जमीन, अब कट रही अवैध कॉलोनी; जांच शुरू

उत्तराखंड सरकार ने इस्लामिक इंस्टीट्यूट बनाने के लिए आवंटित की गई 20 एकड़ जमीन की जांच के आदेश दे दिए हैं। आरोप है कि इस जमीन पर अवैध रूप से समुदाय विशेष के लोगों को बसाने की कोशिश की जा रही है।

CM Pushkar Singh Dhami

सीएम पुष्कर सिंह धामी, Photo Credit- Social Media

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उत्तर भारत के पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में डेमोग्राफी परिवर्तन एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है और सरकार भी इसको लेकर सख्त है। इस बीच पछवादून में भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के पास धौसाल-हरियावाल क्षेत्र में एक चैरिटेबल ट्रस्ट की 20 एकड़ खेती की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि इस जमीन पर एक समुदाय विशेष के लोगों को बेचने की कोशिश की जा रही है। 

 

जिस जमीन को लेकर अब विवाद शुरू हुआ है वह जमीन दो दशक पहले उस समय की कांग्रेस सरकार के राज में आवंटित की गई थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि करीब 20 साल पहले जो जमीन स्कूल या यूनिवर्सिटी खोलने के लिए ली गई थी उसे अब रहने के मकसद से छोटे प्लॉट में बेचा जा रहा है, जिससे मिलिट्री ट्रेनिंग इंस्टिट्यूशन की सिक्योरिटी को खतरा है।

 

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सीएम धामी ने कांग्रेस पर लगाए आरोप 

सरकार का कहना है कि यह सोची-समझी साजिश के तहत डेमोग्राफी बदलने की कोशि है। इस मामले में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच के आदेश दे दिए हैं और कहा है कि सरकार सख्त ऐक्शन लेगी। सीएम धामी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह साफ हो गया है कि यह लोग (कांग्रेसी) जो वहां मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की बात करते थे, अब तक वहां मुस्लिम यूनिवर्सिटी बना भी चुके होते अगर इनकी सरकार होती। बीजेपी प्रवक्ता और विधायक विनोद चमोली ने भी कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि इस मामले ने एक बार फिर कांग्रेस की खतरनाक साजिश को सामने ला दिया है। 

कांग्रेस ने दिया जवाब

सीएम धामी के आरोप पर कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह मामला 2004 का है, जब नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे। उन्होंने कहा, 'यह 2004 का पुराना मामला है, जब नारायण दत्त तिवारी  सरकार के मुखिया थे। उसके बाद, BJP कई बार सत्ता में आई और वे इस अलॉटमेंट को कैंसिल कर सकते थे।'

 

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मामले की जांच जारी

इस मामले में कोर्ट के आदेश के बावजूद भी जमीन को ट्रांसफर कर उस पर अवैध आवास बनाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। जिस ट्रस्ट को यह जमीन दी गई थी उसने इस मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया है।  ट्रस्ट ने रईस अहमद नामक व्यक्ति को जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी दे दी है। सरकारी दस्तावेजों में रईस ही जमीन की बिक्री और प्लॉटिंग का काम देख रहे हैं। प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि ट्रस्ट की 20 एकड़ जमीन में यह जमीन वन विभाग या सरकारी जमीन तो नही है। इसके साथ ही खरीददारों के बैकग्राउंड को भी चेक किया जा सकता है। 

 

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