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आखिर क्या होती है 'बेअदबी'? वह मुद्दा जिसने पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया

पंजाब की राजनीति में बेअदबी एक बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है। बीते कुछ दिनों से राज्य में बेअदबी के मामले चर्चा में हैं। समझिए बेअदबी होता क्या है।

Golden Temple Amritsar

श्री दरबार साहिब, Photo Credit: Social Media

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बेअदबी का मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। पंजाब सरकार ने बेअदबी के दोषियों को सजा देने के लिए कानून बनाया है और उस कानून को सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब ने स्वीकार करने से मना कर दिया है। इसके साथ ही पंजाब के सीएम भगवंत मान पर एक कथित वायरल वीडियो के कारण अकाल तख्त ने गुरु दोही घोषित कर दिया है। राजनीतिक मंचों से लेकर धार्मिक और सामाजिक बहसों में आजकल हर जगह बेअदबी शब्द सुनाई दे रहा है। कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर यह बेअदबी शब्द है क्या?

 

आसान भाषा में समझें तो बेअदबी का मतलब किसी धार्मिक ग्रंथ, धार्मिक प्रतीक, धार्मिक स्थल या आस्था से जुड़ी किसी पवित्र चीज का अपमान, अनादर या उसका अपवित्र करना होता है। सिख धर्म में यह विषय विशेष रूप से श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़ा हुआ माना जाता है, क्योंकि सिख धर्म में गुरु ग्रंथ साहिब को केवल धार्मिक पुस्तक नहीं बल्कि जीवित गुरु का दर्जा दिया गया है।

 

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गुरु ग्रंथ साहिब का महत्व?

सिख परंपरा के अनुसार दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु परंपरा को खत्म कर गुरु ग्रंथ साहिब को अंतिम और शाश्वत गुरु घोषित किया था। इसी कारण गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति श्रद्धा और सम्मान सिख धार्मिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पंजाब में सिखों की आबादी बहुसंख्यक है। ऐसे में पंजाब में बेअदबी का मुद्दा काफी संवेदनशील है। 

बेअदबी को लेकर विवाद

पंजाब में बेअदबी का मुद्दा पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा राजनीतिक और सामाजिक रूप से चर्चा में तब आया, जब 2015 में फरीदकोट जिले के बरगाड़ी क्षेत्र में गुरु ग्रंथ साहिब के अंगों के कथित अपमान का मामला सामने आया। इस घटना के बाद राज्य के कई हिस्सों में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई भी हुई और यह मामला लंबे समय तक राजनीतिक विवाद का विषय बना रहा।

 

इसके बाद बेअदबी केवल धार्मिक मामला नहीं रहा, बल्कि पंजाब की राजनीति में जवाबदेही, कानून व्यवस्था और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। अलग-अलग राजनीतिक दलों ने समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। 2017 में पंजाब में कांग्रेस ने इस मु्द्दे को मुखरता से उठाया था और अपनी सरकार बनाई थी। इसके बाद 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार ने भी बेअदबी की घटनाओं से सख्ती से निपटने की बात की थी। 

 

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संवेदनशील मुद्दा है बेअदबी

सिख संगठनों का कहना रहा है कि बेअदबी की घटनाएं केवल कानून तोड़ने का मामला नहीं हैं, बल्कि यह करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को गहराई से प्रभावित करती हैं। अकाल तख्त साहिब से भी समय-समय पर सरकारों पर बेअदबी के मामलों से सख्ती से निपटने की बात की जाती है। सरकार का पक्ष होता है कि कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाती है।

 

यह मुद्दा कई बार दोनों के बीच टकराव का कारण भी बन जाता है। 2015 के बेअदबी के मामलों में शिरोमणि अकाली दल के नेता अभी तक फंसते आए हैं। अब जब आम आदमी पार्टी की सरकार बेअदबी को लेकर नया कानून लेकर आई है तो इस पर अकात तख्त और सिख संस्थाओं ने विरोध जाहिर कर दिया है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में एक बार फिर बेअदबी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा  सकता है। 

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